Kota Cancer Unit: हाड़ौती के कैंसर मरीजों को बड़ी राहत — 149 करोड़ की कैंसर यूनिट को वित्तीय स्वीकृति, बिरला बोले ‘काम तुरंत शुरू हो’

कोटा: अगर आपके परिवार में किसी को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चले, तो सबसे पहला सवाल दिमाग में यही आता है — इलाज कहां करवाएं? कोटा-हाड़ौती के लाखों लोगों के लिए अब तक इसका जवाब एक ही था: जयपुर या दिल्ली जाओ। लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है। कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल परिसर में 149 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली अत्याधुनिक कैंसर यूनिट को सरकार से वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिया कि स्वीकृति मिलते ही काम तुरंत शुरू किया जाए, कागजी प्रक्रिया में इसे अटकाया न जाए। इस एक घोषणा के साथ कोटा में स्वास्थ्य सुविधाओं की कुल 175 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम की राह खुल गई है — जिनमें एमबीएस अस्पताल में तीन मंजिला सेंट्रल लैब, नए सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन, बर्न यूनिट और महिला-शिशु अस्पताल जैसे काम शामिल हैं।

हाड़ौती के लिए सबसे बड़ी राहत: अब इलाज के लिए महानगरों के चक्कर नहीं

इस खबर का असली वजन आंकड़ों में नहीं, एक कड़वे सच में है — हाड़ौती संभाग के 250 किलोमीटर के दायरे में आज कहीं भी कैंसर का समर्पित अस्पताल नहीं है। कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इलाज के लिए मरीज कोटा से जयपुर या दिल्ली का रास्ता पकड़ते हैं। गरीब परिवारों के लिए यह सिर्फ दूरी का सवाल नहीं है — यात्रा, ठहरने, खाने और महीनों चलने वाले इलाज का खर्च मिलाकर इलाज का बोझ दोगुना हो जाता है। नई कैंसर यूनिट इसी मजबूरी को तोड़ने के लिए बनाई जा रही है। इस यूनिट में केवल कैंसर का इलाज होगा — निदान से उपचार तक की पूरी श्रृंखला एक ही परिसर में। बिरला ने कहा कि गंभीर बीमारियों का बेहतर और सस्ता इलाज कोटा में ही मिले, ताकि मरीज और उसका परिवार आर्थिक और मानसिक, दोनों मोर्चों पर टूटे नहीं। कोटा संभाग के साथ बारां, बूंदी, झालावाड़ और आसपास के जिलों के मरीजों को भी सीधा फायदा मिलेगा।

149 करोड़ की कैंसर यूनिट: बजट में घोषणा थी, अब पैसा भी जारी

यह परियोजना नई नहीं है — राज्य के बजट में ही कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में कैंसर यूनिट बनाने की घोषणा की गई थी। घोषणा और जमीन पर काम के बीच जो खाई होती है, उसे पाटने का काम वित्तीय स्वीकृति करती है। अब 148.86 करोड़ रुपये (लगभग 149 करोड़) की वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है, यानी ठेके, खरीद और निर्माण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ सकती है। शनिवार को बिरला ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, अस्पताल अधीक्षकों और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंसर यूनिट की मांग कोटा में लंबे समय से उठ रही थी और अब स्वीकृति मिल गई है तो काम में देरी बर्दाश्त नहीं होगी। मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में 25 करोड़ रुपये के अन्य विकास कार्यों को भी वित्तीय सहमति मिली है — इसमें नए अस्पताल के सामने गार्डन का विकास, परिसर में निर्माण और मरम्मत कार्य शामिल हैं।

सिर्फ कैंसर यूनिट नहीं: 175 करोड़ का पूरा स्वास्थ्य पैकेज

कोटा के अस्पतालों में एक साथ कई मोर्चों पर काम होगा:

परियोजनाअनुमानित लागत/विवरणफायदा
कैंसर यूनिट (नया अस्पताल परिसर)149 करोड़ रुपयेसिर्फ कैंसर का समर्पित इलाज, हाड़ौती को राहत
एमबीएस कैंपस में सेंट्रल लैबतीन मंजिला भवनसभी जांचें एक जगह, रिपोर्ट में तेजी
अत्याधुनिक सीटी स्कैन व एमआरआईनई मशीनेंजांच की लंबी वेटिंग खत्म होगी
बर्न यूनिटनया अस्पताल परिसरजलने के गंभीर मरीजों का विशेष इलाज
महिला एवं बाल अस्पतालनिर्माणाधीनमां और नवजात की विशेष देखभाल
कॉटेज व क्यूबिकल, रामाश्रमनिर्माणाधीनमरीज के साथ आए परिजनों के रहने-खाने की व्यवस्था
अस्पताल परिसर विकास25 करोड़ के कार्यगार्डन, मरम्मत व अन्य बुनियादी सुविधाएं

सीटी स्कैन और एमआरआई की नई मशीनों का असर सबसे जल्दी दिखेगा — आज इन जांचों के लिए मरीजों को हफ्तों का इंतजार करना पड़ता है, और कई बार जांच में देरी से इलाज भी देर से शुरू होता है।

मरीज के साथ आने वालों के लिए भी सोचा गया

अक्सर अस्पतालों की योजनाएं मरीज तक ही सीमित रह जाती हैं, लेकिन इस बार परिजनों का भी ख्याल रखा गया है। नए अस्पताल परिसर में ‘रामाश्रम’ बनाया जा रहा है — ताकि इलाज कराने आए व्यक्ति के साथ आने वाले परिजन के रहने-खाने की व्यवस्था परिसर में ही हो सके। दूर-दराज के गांवों से आने वाले परिवारों के लिए यह छोटी सुविधा बड़ी राहत होगी, क्योंकि महीनों चलने वाले इलाज में परिजन का ठहरना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होता है।

अगला कदम: तीन महीने में निजी क्षेत्र के कैंसर अस्पताल भी

सरकारी निवेश के साथ-साथ निजी क्षेत्र भी कोटा की तरफ देख रहा है। बिरला के अनुसार अगले तीन महीनों में कोटा में निजी संस्थाएं भी कैंसर अस्पताल खोलेंगी, जहां कैंसर के साथ-साथ अन्य सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी मिलेंगी। साथ ही नए मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पताल खोलने की योजना पर भी काम चल रहा है, ताकि कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ समेत पूरे हाड़ौती क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हो सकें। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कोटा में इलाज के विकल्प बढ़ेंगे — सरकारी कैंसर यूनिट सस्ता और सुलभ इलाज देगी, वहीं निजी अस्पताल उन मरीजों के लिए विकल्प होंगे जो अतिरिक्त सुविधाएं चाहते हैं।

बचाव भी जरूरी: ‘तंबाकू से दूर रहें’ — बिरला की अपील

इलाज की सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ बिरला ने बचाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कैंसर के ज्यादातर कारण लाइफस्टाइल से जुड़े हैं और तंबाकू इसका सबसे बड़ा कारण है। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कैंसर के कारणों को समझें और उनसे दूर रहें — तंबाकू छोड़ना, संतुलित खान-पान और समय पर जांच से खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: कोटा में कैंसर यूनिट कहां बनेगी और इसमें कितना खर्च आएगा?

उत्तर: यह यूनिट कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल परिसर में बनेगी। इसके लिए 149 करोड़ रुपये (148.86 करोड़) की वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है। यहां केवल कैंसर का इलाज होगा।

प्रश्न 2: इस यूनिट से किन जिलों के मरीजों को फायदा होगा?

उत्तर: कोटा संभाग के साथ-साथ बारां, बूंदी, झालावाड़ और आसपास के इलाकों के मरीजों को फायदा मिलेगा। अभी हाड़ौती के 250 किलोमीटर के दायरे में कोई कैंसर अस्पताल नहीं है, इसलिए मरीजों को जयपुर या दिल्ली जाना पड़ता है।

प्रश्न 3: कैंसर यूनिट के अलावा कोटा के अस्पतालों में और क्या-क्या बनेगा?

उत्तर: एमबीएस कैंपस में तीन मंजिला सेंट्रल लैब, अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें, बर्न यूनिट, महिला एवं बाल अस्पताल, कॉटेज-क्यूबिकल और परिजनों के लिए रामाश्रम का निर्माण होगा। कुल 175 करोड़ रुपये के कार्य अस्पतालों में होंगे।

प्रश्न 4: क्या निजी अस्पतालों में भी कैंसर का इलाज मिलेगा?

उत्तर: हां। अगले तीन महीनों में कोटा में निजी संस्थाएं भी कैंसर अस्पताल खोलने जा रही हैं, जहां कैंसर के साथ अन्य सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

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