सलूम्बर जिले के सराड़ा और सेमारी क्षेत्र के गांवों में रहने वाले चार लाख से अधिक लोगों के लिए एक बड़ी राहत की उम्मीद बंधी है। इन इलाकों में आज भी अधिकतर गांव और बस्तियां पर्याप्त पेयजल और सिंचाई की सुविधाओं से वंचित हैं, लेकिन अब जयसमन्द झील का पानी इन क्षेत्रों तक पहुंचाने की एक अतिरिक्त योजना की स्वीकृति का आग्रह मुख्यमंत्री के सामने रखा गया है।
उदयपुर से सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस योजना को स्वीकृति देने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जयसमन्द झील के जल को सलूम्बर जिले के सराड़ा और सेमारी क्षेत्र सहित मेवल के वंचित इलाकों तक प्राथमिकता के आधार पर पेयजल और सिंचाई के लिए पहुंचाया जाए, और स्थानीय जलस्रोतों को जयसमन्द झील से जोड़ने की कार्रवाई के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए जाएं। यह पत्र 3 अक्टूबर को सामने आया है और स्थानीय मीडिया में इसकी चर्चा जोरों पर है।
किन गांवों और क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
सराड़ा पंचायत समिति के अंतर्गत सराड़ा, केजड़, चावण्ड, नठारा, नालहल्कार, सरसियां और थाना जैसी ग्राम पंचायतों सहित आसपास के क्षेत्रों को इस प्रस्तावित योजना के दायरे में रखा गया है। इसके साथ ही सेमारी पंचायत समिति का पूरा क्षेत्र भी इसमें शामिल होगा।
इन इलाकों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्थानीय स्तर पर निरंतर और उचित क्षमता वाले जलस्रोत बहुत सीमित हैं। इस कारण ग्रामीणों को लगातार जलसंकट का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष मानसून में कम वर्षा के चलते यह समस्या और गहरी हो गई है। हालात यह हैं कि जयसमन्द झील का पानी इन स्थानीय क्षेत्रों तक नहीं पहुंचने के कारण गांवों और मेवल क्षेत्र के लोगों में लंबे समय से रोष बना हुआ है, और वे लगातार झील का पानी उपलब्ध कराने की मांग करते आ रहे हैं।
जाखम-जयसमन्द वृहद जल परियोजना: ₹7,300 करोड़ से अधिक की महत्वाकांक्षी योजना
सांसद डॉ. रावत ने पत्र में मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया कि उदयपुर संसदीय क्षेत्र में स्थित जयसमन्द झील को सालभर जल से परिपूर्ण रखने और इसके जल का पेयजल तथा सिंचाई के लिए व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने हेतु जाखम-जयसमन्द वृहद जल परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹7,300 करोड़ से अधिक की लागत आएगी। योजना की पृष्ठभूमि यह है कि माही और जाखम नदियों का बांध की क्षमता से अधिक पानी हर साल बहकर अरब सागर में चला जाता था। अब इसी अतिरिक्त जल का उपयोग जयसमन्द झील को भरने और पेयजल तथा सिंचाई के काम में किया जाएगा। इससे दक्षिण राजस्थान के 9 जिलों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है, जिनमें अधिकांश ग्रामीण और जनजाति क्षेत्र हैं।
सांसद के अनुसार सराड़ा, सेमारी और मेवल क्षेत्र के लिए प्रस्तावित नई पहल इस जाखम-जयसमन्द वृहद जल परियोजना को और अधिक व्यापक तथा जनोपयोगी बनाएगी। यह कदम विकसित भारत के तहत विकसित राजस्थान और विकसित सलूम्बर की दिशा में — खासतौर पर आकांक्षी जनजाति क्षेत्रों के रूपांतरण के लिए — महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है।
योजना की मुख्य जानकारी एक नज़र में
| पहलू | जानकारी |
|---|---|
| मांग किसने रखी | सांसद डॉ. मन्नालाल रावत (उदयपुर) |
| पत्र किसे लिखा | मुख्यमंत्री, राजस्थान |
| लक्षित क्षेत्र | सराड़ा, सेमारी (सलूम्बर जिला) और मेवल के वंचित क्षेत्र |
| प्रत्यक्ष लाभार्थी | लगभग 4 लाख से अधिक आबादी |
| उपयोग का उद्देश्य | पेयजल और सिंचाई |
| जुड़ी प्रमुख परियोजना | जाखम-जयसमन्द वृहद जल परियोजना (लागत ₹7,300 करोड़ से अधिक) |
| व्यापक लाभ | दक्षिण राजस्थान के 9 जिले (ग्रामीण व जनजाति क्षेत्र) |
क्यों अहम है यह पहल
दक्षिण राजस्थान के जनजाति बहुल इलाकों में पानी की किल्लत कोई नई बात नहीं है। सरकारें आती-जाती रहीं, घोषणाएं होती रहीं, लेकिन सराड़ा और सेमारी जैसे क्षेत्रों के कई गांव आज भी हर गर्मी और कम वर्षा वाले साल में पानी के लिए तरस जाते हैं। ट्यूबवेल और कुएं सूखते हैं, खेतों में सिंचाई रुकती है और पशुधन के लिए चारा-पानी की समस्या खड़ी हो जाती है।
इस प्रस्तावित योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह मौजूदा बड़ी परियोजना (जाखम-जयसमन्द) के साथ जुड़कर स्थानीय स्तर तक पानी पहुंचाने का रास्ता बनाती है। यानी बड़ी झील और बड़ी परियोजना का फायदा सीधे उन गांवों तक पहुंचेगा, जो आज तक इससे दूर रहे हैं। स्थानीय जलस्रोतों को जयसमन्द झील से जोड़ने की मांग इसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: जयसमन्द का पानी किन क्षेत्रों तक पहुंचाने की मांग की गई है?
जवाब: सलूम्बर जिले के सराड़ा और सेमारी क्षेत्र सहित मेवल के वंचित इलाकों तक जयसमन्द झील का जल पेयजल और सिंचाई के लिए पहुंचाने की मांग सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की है।
सवाल: इस योजना से कितने लोगों को फायदा होगा?
जवाब: प्रस्ताव के अनुसार क्षेत्र की लगभग 4 लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
सवाल: जाखम-जयसमन्द वृहद जल परियोजना की लागत कितनी है?
जवाब: इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत लगभग ₹7,300 करोड़ से अधिक बताई गई है, जिससे दक्षिण राजस्थान के 9 जिलों को लाभ मिलेगा।
सवाल: सराड़ा-सेमारी क्षेत्र में पानी की समस्या इतनी गंभीर क्यों है?
जवाब: इन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर निरंतर और उचित क्षमता वाले जलस्रोत सीमित हैं। इस वर्ष कम वर्षा के कारण जलसंकट और गहरा गया है, जिससे ग्रामीणों को पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए परेशानी हो रही है।
आगे क्या
अब सबकी नज़र मुख्यमंत्री कार्यालय और जलदाय विभाग पर रहेगी कि इस अतिरिक्त योजना को कब स्वीकृति मिलती है और स्थानीय जलस्रोतों को जयसमन्द झील से जोड़ने का काम कब शुरू होता है। प्रशासनिक स्तर पर अगला चरण होगा तकनीकी सर्वे और प्रस्तावित पाइपलाइन तथा जोड़-कार्य का विस्तृत खाका तैयार करना, क्योंकि सराड़ा-सेमारी के पहाड़ी और जनजाति क्षेत्रों में पेयजल नेटवर्क बिछाना मैदानी इलाकों से अलग चुनौती पेश करता है।
सलूम्बर के गांवों के लिए यह सिर्फ एक पत्र नहीं, बल्कि पानी की आस और सिंचाई की उम्मीद का मामला है। अगर योजना स्वीकृति पाकर धरातल पर उतरती है, तो आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों की तकदीर बदल सकती है — हर घर तक नल का पानी और खेतों तक सिंचाई का जल, यही इन ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है।