कोटा प्रसूता मौत मामला: चार जांच कमेटियों की क्लीनचिट के बाद तीनों निलंबित डॉक्टर बहाल

कोटा प्रसूता मौत मामला: चार जांच कमेटियों की क्लीनचिट के बाद तीनों निलंबित डॉक्टर बहाल

कोटा के बहुचर्चित प्रसूता मौत और किडनी फेल्योर मामले में करीब पांच महीने से निलंबित चल रहे तीनों डॉक्टरों को बहाल कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त शासन सचिव डॉ. ज्योति चौहान ने शुक्रवार (2 अक्टूबर 2026) को तीनों डॉक्टरों की बहाली के आदेश जारी किए। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हुए हैं और तीनों डॉक्टरों को वापस कोटा मेडिकल कॉलेज में ही पदस्थापित किया गया है। बताया जा रहा है कि तीनों डॉक्टर शनिवार (3 अक्टूबर) से अपनी ड्यूटी पर लौटेंगे।

बहाल किए गए डॉक्टरों में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के आचार्य प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार, सह आचार्य डॉ. खुशबू मीणा और जनरल सर्जरी विभाग के सह आचार्य डॉ. नवनीत कुमार शामिल हैं। मई 2026 में प्रसूताओं की मौत के बाद इन तीनों को निलंबित कर दिया गया था। तब से लेकर अब तक इनके करियर और सम्मान पर तलवार लटकी हुई थी। अब जांच कमेटियों की रिपोर्ट आने के बाद इनका निलंबन पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।

बहाली के आदेश में क्या-क्या कहा गया है

चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त शासन सचिव डॉ. ज्योति चौहान द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मामले की जांच के लिए गठित चारों समितियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और किसी भी रिपोर्ट में तीनों डॉक्टर-शिक्षकों को दोषी नहीं माना गया है। इस आधार पर विभाग ने तीनों का निलंबन तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें बहाल कर दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि तीनों डॉक्टरों को उसी मेडिकल कॉलेज कोटा में पदस्थापित किया जा रहा है, जहां से उन्हें निलंबित किया गया था।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को आदेश जारी होने के बाद तीनों डॉक्टरों ने ड्यूटी ज्वाइन करने की औपचारिकताएं शुरू कर दी थीं। शनिवार से वे अपने-अपने विभागों में दोबारा काम संभाल लेंगे। गौरतलब है कि निलंबन की अवधि के दौरान इन डॉक्टरों को विभागीय प्रक्रिया के तहत ही आना-जाना पड़ रहा था, जो उनके लिए मानसिक रूप से काफी कठिन समय था।

कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली — चारों कमेटियों ने एक ही निष्कर्ष दिया

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच के लिए चार अलग-अलग उच्चस्तरीय कमेटियां बनाई गई थीं। सबसे पहले मेडिकल कॉलेज कोटा ने अपने स्तर पर ही एक जांच कमेटी गठित की थी। इसके बाद सरकार ने मेडिकल कॉलेज जयपुर से एक कमेटी कोटा भेजी। मामला ज्यादा हाईलाइट होने पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की टीम भी कोटा भेजी गई, जिसमें दिल्ली के साथ-साथ जोधपुर और अन्य एम्स के डॉक्टर शामिल थे। चौथी कमेटी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से एडिशनल डायरेक्टर की अगुवाई में गठित की गई थी।

इन चारों कमेटियों ने दवाओं की गुणवत्ता, उपचार की प्रक्रिया, संक्रमण के संभावित स्रोतों और मरीजों की केस हिस्ट्री की तकनीकी पड़ताल की। रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया कि डॉक्टरों ने प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया था और उनकी ओर से कोई व्यक्तिगत गलती या चिकित्सकीय लापरवाही नहीं बरती गई थी। यानी कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली — चारों जगहों की जांच टीमों ने एक ही निष्कर्ष दिया: डॉक्टर दोषी नहीं हैं।

जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक और मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. निर्मला शर्मा ने भी तीनों डॉक्टरों की बहाली की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बहाल किए गए तीनों में दो स्त्री रोग विभाग के और एक सर्जरी विभाग के डॉक्टर हैं।

मई 2026: महज 13 दिन में 5 मौतों ने मचाया था हड़कंप

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत मई 2026 में हुई थी। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल तथा जेके लोन हॉस्पिटल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल्योर के मामले सामने आए थे। महज 13 दिनों में 5 प्रसूताओं की मौत के बाद चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया था। शुरुआत में कोटा में पांच प्रसूताओं में यह दिक्कत सामने आई थी, जिसका खुलासा 5 मई 2026 को हुआ। बाद में कुल 12 महिलाओं को संक्रमित माना गया।

इनमें से चार प्रसूता और एक गर्भवती महिला — पायल, ज्योति, पिंकी महावर, प्रिया और शिरीन — की मौत हो गई। बाकी सात महिलाओं रागिनी, धन्नी, सुशीला, चंद्रकला, किरण, पिंकी और आरती को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मौतों के बाद विपक्ष और जनता में भारी आक्रोश फैल गया था। राज्य सरकार ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए 9 मई को डॉ. नवनीत कुमार को और 12 मई को डॉ. बीएल पाटीदार व डॉ. खुशबू मीणा को निलंबित कर दिया था। इसके बाद दो और चिकित्सकों तथा दो नर्सिंगकर्मियों को भी निलंबित किया गया था, जबकि अस्पताल अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

पीड़ित परिवारों का सवाल: जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?

डॉक्टरों की बहाली पर एक तरफ राहत है, तो दूसरी तरफ पीड़ित परिवारों के चेहरे पर अभी भी सवाल हैं। प्रसूता रागिनी की तबीयत इस घटना के बाद से बिगड़ी हुई है और वह वर्तमान में डायलिसिस पर हैं। उनकी किडनी काम नहीं कर रही है। सरकार ने किडनी ट्रांसप्लांट का आश्वासन दिया था, लेकिन रागिनी के पति लोकेश का कहना है कि उन्हें कोई सहायता नहीं मिली है, केवल आश्वासन दिया गया है। ट्रांसप्लांट की बात कहने पर परिवार से ही किडनी डोनेट करने के लिए कहा जा रहा है।

लोकेश का सीधा सवाल है — अगर डॉक्टरों को क्लीनचिट दे दी गई है, तो फिर यह घटनाक्रम क्यों और कैसे हुआ? क्या-क्या कारण रहे, यह हमें पता चलना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को चारों जांच कमेटियों की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को सच्चाई पता चल सके। उनका तर्क है कि पांच महिलाओं की जान गई है, इसलिए सिर्फ डॉक्टरों की बहाली से मामला खत्म नहीं हो जाता।

कोटा के बाद दूसरे जिलों में भी सामने आए थे ऐसे मामले

गौरतलब है कि कोटा के मामले के बाद प्रदेश के अन्य जिलों से भी प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं सामने आई थीं। बीकानेर के बाद जोधपुर में भी सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था, जिनमें 2 की किडनी फेल होने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था। इन घटनाओं ने पूरे प्रदेश की सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कोटा मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद अब अस्पतालों में दवा प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण और उपचार प्रोटोकॉल को लेकर नई गाइडलाइन तैयार की जा सकती है। हालांकि फिलहाल विभाग का ध्यान डॉक्टरों की बहाली और अस्पतालों की सामान्य कार्यप्रणाली बहाल करने पर है।

घटनाक्रम: एक नजर में

तारीख घटनाक्रम
5 मई 2026 कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में प्रसूताओं के किडनी फेल्योर का खुलासा
9 मई 2026 डॉ. नवनीत कुमार (सह आचार्य, जनरल सर्जरी) निलंबित
12 मई 2026 प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. खुशबू मीणा निलंबित
मई-जून 2026 दो और चिकित्सक, दो नर्सिंगकर्मी निलंबित; अधीक्षकों को नोटिस
मई-सितंबर 2026 कोटा, जयपुर, जोधपुर, दिल्ली की 4 कमेटियों ने जांच की
2 अक्टूबर 2026 डॉ. ज्योति चौहान ने तीनों डॉक्टरों की बहाली के आदेश जारी किए
3 अक्टूबर 2026 तीनों डॉक्टर ड्यूटी पर लौटेंगे

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: किन तीन डॉक्टरों को बहाल किया गया है?
उत्तर: प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार (आचार्य, स्त्री एवं प्रसूति रोग), डॉ. खुशबू मीणा (सह आचार्य, स्त्री एवं प्रसूति रोग) और डॉ. नवनीत कुमार (सह आचार्य, जनरल सर्जरी) — तीनों कोटा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हैं। तीनों को वापस कोटा मेडिकल कॉलेज में ही पदस्थापित किया गया है।

प्रश्न 2: चारों जांच कमेटियों ने क्लीनचिट किस आधार पर दी?
उत्तर: कमेटियों ने दवाओं, उपचार प्रक्रिया, संक्रमण के स्रोतों और केस हिस्ट्री की तकनीकी जांच के बाद पाया कि डॉक्टरों ने प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया था और उनकी कोई व्यक्तिगत गलती या चिकित्सकीय लापरवाही नहीं थी।

प्रश्न 3: डॉक्टरों को कब निलंबित किया गया था?
उत्तर: 9 मई 2026 को डॉ. नवनीत कुमार को और 12 मई 2026 को डॉ. बीएल पाटीदार व डॉ. खुशबू मीणा को निलंबित किया गया था। इसके बाद दो और चिकित्सकों और दो नर्सिंगकर्मियों पर भी कार्रवाई हुई थी।

प्रश्न 4: पीड़ित परिवारों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: पीड़ित परिवार चाहते हैं कि चारों जांच कमेटियों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि पता चल सके कि 5 महिलाओं की मौत आखिर क्यों और कैसे हुई। डायलिसिस पर चल रही रागिनी के परिवार को किडनी ट्रांसप्लांट का आश्वासन भी पूरा करने की मांग है।

निष्कर्ष

करीब पांच महीने तक चला यह विवाद अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। तीनों डॉक्टरों के लिए निलंबन का कलंक धुल गया है और वे शनिवार से फिर से मरीजों की सेवा में लौट रहे हैं। लेकिन इस मामले का दूसरा पहलू — पीड़ित परिवारों के सवाल — अभी भी अनुत्तरित है। अगर डॉक्टर दोषी नहीं थे, तो पांच महिलाओं की जान कैसे गई? इस सवाल का जवाब तभी मिलेगा जब जांच रिपोर्टें सार्वजनिक होंगी और अस्पतालों की व्यवस्था में असल सुधार होगा। फिलहाल सभी की नजरें चिकित्सा शिक्षा विभाग के अगले कदमों पर टिकी हैं।

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