मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के 15 साल: 1,800 से ज्यादा मुफ्त दवाएं, 163 करोड़ मरीजों का भरोसा — जानें पूरी कहानी

एक गरीब परिवार के लिए डॉक्टर की फीस से ज्यादा डर उस पर्ची का होता है, जिस पर दवाइयों की लंबी सूची लिखी होती है। महंगी दवाएं, खासकर कैंसर या हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की, कई परिवारों की कमर तोड़ देती हैं। ठीक इसी दर्द को समझकर 2 अक्टूबर 2011 को गांधी जयंती के दिन राजस्थान में एक ऐसी योजना शुरू हुई थी, जिसने पिछले 15 सालों में सरकारी अस्पतालों की तस्वीर बदल दी। आज यानी 2 अक्टूबर 2026 को ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना’ (दवा) के 15 साल पूरे हो गए।

इस मौके पर भरतपुर के आरबीएम चिकित्सालय में फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ ने अस्पताल में भर्ती मरीजों को फल वितरित किए। अस्पताल अधीक्षक डॉ. नगेन्द्र भदौरिया और योजना के नोडल डॉ. मॉरिश अग्रवाल व डॉ. अंकित गर्ग की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में फार्मासिस्ट संघ के प्रदेशाध्यक्ष जल सिंह कुंतल भी शामिल रहे।

15 साल में कितनी बदली तस्वीर: आंकड़े खुद बोलते हैं

योजना के सफर को समझने के लिए आंकड़ों से बेहतर कोई तरीका नहीं है।

विषय 2011 (शुरुआत) 2026 (आज)
योजना का वार्षिक बजट लगभग 195 करोड़ रुपए लगभग 1,300 करोड़ रुपए वार्षिक खर्च (रिपोर्टों के अनुसार बजट करीब 2,788 करोड़ तक)
मुफ्त दवाओं की संख्या कुछ सौ आवश्यक दवाएं 1,800 से अधिक प्रकार की दवाएं (सर्जिकल समेत सूची में कुल 1,829 आइटम)
सालाना लाभार्थी लाखों में हर साल करीब 16 करोड़ मरीज
देश में स्थान नई शुरुआत मुफ्त दवाओं की संख्या में देश में पहले स्थान पर

रिपोर्टों के मुताबिक 15 साल में अब तक करीब 163 करोड़ मरीज इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। शुरुआती दौर में योजना का बजट महज 195 करोड़ रुपए था, जो आज हजारों करोड़ तक पहुंच गया है। यह वृद्धि अपने आप में बताती है कि राज्य सरकार ने इस योजना को कितनी गंभीरता से लिया।

ऐसे शुरू हुई थी मुफ्त दवा की क्रांति

2 अक्टूबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद साफ था — सरकारी अस्पताल आने वाले हर मरीज को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं बिल्कुल मुफ्त मिलें। इसके ठीक कुछ महीने पहले 4 मई 2011 को राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम (RMSCL) का गठन किया गया था, ताकि पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, सर्जिकल सामान और जांच उपकरणों की खरीद एक केंद्रीकृत और पारदर्शी व्यवस्था से हो सके।

योजना के दो मुख्य घटक रखे गए — निःशुल्क दवाएं और निःशुल्क जांच। यानी न सिर्फ दवा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों की जांच भी मुफ्त हो। थैलेसीमिया और हीमोफिलिया जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों को भी मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया।

आज मरीज को क्या-क्या मिलता है?

योजना की ‘आवश्यक दवा सूची’ समय-समय पर बढ़ाई गई है। बजट घोषणा 2019-20 में कैंसर, हृदय, गुर्दा और अन्य गंभीर रोगों के इलाज के लिए 105 औषधियां और 34 सर्जिकल आइटम इस सूची में जोड़े गए। इसके बाद बजट 2022-23 में सभी राजकीय चिकित्सालयों में दवाएं पूरी तरह निःशुल्क करने की घोषणा हुई और सूची का विस्तार करते हुए 635 औषधियां, 255 सर्जिकल्स और 78 सूचर्स शामिल किए गए। आज दोनों चरणों की योजनाओं को मिलाकर आवश्यक दवा सूची में कुल 1,829 औषधियां और सर्जिकल आइटम हैं।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. भदौरिया के अनुसार वर्तमान में 1,800 से अधिक प्रकार की दवाइयां योजना के तहत बांटी जा रही हैं, जिनमें हीमोफिलिया, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और दमा जैसी गंभीर बीमारियों की काफी महंगी दवाएं भी शामिल हैं। यही वजह है कि उपलब्ध दवाओं की संख्या के मामले में राजस्थान आज देश में पहले पायदान पर है।

वर्षगांठ पर फार्मासिस्टों को मिला सम्मान

15वीं वर्षगांठ के मौके पर भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में फार्मासिस्टों की भूमिका को खास तौर पर रेखांकित किया गया। डॉ. भदौरिया ने कहा कि दवा योजना को धरातल पर लागू करने से लेकर इसे देश में पहले स्थान तक पहुंचाने में फार्मासिस्टों का अहम योगदान रहा है। अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र डागुर की उपस्थिति में फार्मासिस्ट संघ के रज्जो सिंह, गंभीर सिंह, हेमंत मीणा, जितेंद्र सिंह कुंतल, जयशिव, जयंत फौजदार, सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार, तेजवीर देशवार, हेमराज सिंह, प्रभुदयाल धाकड़, सौरभ शर्मा और दीनदयाल गुप्ता समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे।

आम मरीज के लिए इसका व्यावहारिक मतलब

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य सरकारी अस्पताल जाता है, तो यह योजना आपके लिए इस तरह काम करती है:

  • ओपीडी पर्ची पर मुफ्त दवा: डॉक्टर के लिखने के बाद अस्पताल के दवा वितरण काउंटर (DDC) से आवश्यक दवा सूची की दवाएं बिना पैसे मिलती हैं।
  • गंभीर बीमारियों की महंगी दवाएं: कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, हीमोफिलिया जैसी बीमारियों की दवाएं भी सूची में हैं, जो बाहर हजारों रुपए में मिलती हैं।
  • मुफ्त जांच: सरकारी संस्थानों में जरूरी जांचें भी निःशुल्क की जाती हैं।
  • कोई आय सीमा नहीं: यह योजना सभी मरीजों के लिए है — अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं।

आगे की राह: चुनौतियां भी कम नहीं

सफलता के बावजूद चुनौतियां बनी हुई हैं — कई बार अस्पतालों में कुछ दवाओं की कमी की शिकायतें आती हैं, खरीद में देरी होती है और फार्मासिस्टों के खाली पद भी मुद्दा रहे हैं। समय पर आपूर्ति और गुणवत्ता पर निगरानी ही इस योजना की साख बनाए रखेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना कब शुरू हुई थी?
यह योजना 2 अक्टूबर 2011 को शुरू हुई थी। आज 2 अक्टूबर 2026 को इसके 15 साल पूरे हो गए हैं।

2. इस योजना में कौन-कौन सी दवाएं मुफ्त मिलती हैं?
आवश्यक दवा सूची में 1,800 से अधिक प्रकार की दवाएं हैं, जिनमें कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, हीमोफिलिया और दमा जैसी गंभीर बीमारियों की महंगी दवाएं भी शामिल हैं। साथ ही सर्जिकल सामान और जरूरी जांचें भी मुफ्त हैं।

3. क्या इस योजना के लिए कोई आय सीमा या कार्ड जरूरी है?
नहीं। सरकारी अस्पताल में इलाज कराने वाले हर मरीज को यह सुविधा मिलती है — किसी खास कार्ड या आय प्रमाण की जरूरत नहीं होती।

4. दवाएं कहां से मिलेंगी?
जिस सरकारी अस्पताल में आप इलाज करा रहे हैं, वहीं डॉक्टर की पर्ची दिखाकर दवा वितरण काउंटर से मुफ्त दवाएं ले सकते हैं।

15 साल पहले गांधी जयंती के दिन शुरू हुई यह योजना आज राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था की पहचान बन चुकी है। भरतपुर में मरीजों के बीच फल बांटकर मनाई गई यह वर्षगांठ उस भरोसे का प्रतीक है, जो करोड़ों मरीजों ने इस योजना पर जताया है।

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