राजस्थान में म्यूल अकाउंट स्कैम का बड़ा खुलासा: 82 हजार संदिग्ध खाते चिन्हित, 650 से ज्यादा गिरफ्तार — पुलिस की चेतावनी

राजस्थान में साइबर ठगों ने अपराध का नया रास्ता चुन लिया है — और इस रास्ते पर सबसे पहले वही फंसते हैं, जिनका खाता ठगी के पैसे को घुमाने में इस्तेमाल होता है। राज्य पुलिस के साइबर सेल के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश में 82 हजार से ज्यादा संदिग्ध “म्यूल अकाउंट्स” की पहचान हुई, 723 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हुए और 650 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सबसे पहली गिरफ्तारी खाताधारक की — कानून क्या कहता है

पुलिस ने इस मसले पर जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही है, वह यह है कि पकड़े जाने पर सबसे पहले गिरफ्तारी उसी व्यक्ति की होती है, जिसके नाम पर बैंक खाता होता है। भले ही असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे बैठा हो, लेकिन कानूनी कार्रवाई का पहला झटका खाताधारक को ही झेलना पड़ता है। खातों का इस्तेमाल अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के काले धन को ठिकाने लगाने के लिए हो रहा है। ठगों का मुख्य निशाना छात्र और बेरोजगार युवा हैं, और पुलिस की चेतावनी साफ है — “किराए पर दिया गया हर बैंक अकाउंट सीधे तौर पर साइबर अपराध से जुड़ा हो सकता है।”

ठग कैसे फंसाते हैं: सोशल मीडिया का जाल

साइबर अपराधी इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। “पार्ट-टाइम जॉब”, “गेम फंड” या “घर बैठे आसान कमाई” जैसे आकर्षक विज्ञापन दिखाकर वे युवाओं से बैंक खाता, एटीएम कार्ड या यूपीआई आईडी कुछ दिनों के लिए किराए पर मांगते हैं — बदले में हर ट्रांजैक्शन पर 500 से लेकर कुछ हजार रुपये तक कमीशन का झांसा। खाता मिलते ही ठगी का पैसा उसमें आता है और कुछ ही मिनटों में निकालकर आगे ट्रांसफर या क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता है। इसी खाते को पुलिस की भाषा में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।

जिलेवार कार्रवाई: नागौर से झुंझुनूं तक बड़ी गिरफ्तारी

नागौर में एक इंटर-स्टेट रैकेट का पर्दाफाश हुआ — 24 गिरफ्तारियां, 84 म्यूल अकाउंट्स जिनसे करोड़ों रुपये घुमाए गए थे। झालावाड़ (भवानीमंडी) में तीन आरोपियों से 53 एटीएम कार्ड, चेकबुक और नकदी बरामद हुई। जयपुर में 6.80 करोड़ रुपये के फ्रॉड में म्यूल अकाउंट्स और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल सामने आया, तो झुंझुनूं में 200 करोड़ रुपये तक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ। जोधपुर, अलवर और सीकर में भी गिरफ्तारियां हुई हैं। विडंबना यह है कि खाता देने वालों को कई बार सिर्फ 8-15 हजार रुपये कमीशन मिला था।

7 महीनों का लेखा-जोखा: आंकड़े क्या बताते हैं

विषय आंकड़ा
पहचाने गए संदिग्ध म्यूल अकाउंट 82,000 से ज्यादा
दर्ज गंभीर मामले 723 से ज्यादा
गिरफ्तार लोग 650 से ज्यादा
समयावधि जनवरी–जुलाई 2026
सबसे बड़ा एकल खुलासा (झुंझुनूं) ~200 करोड़ रुपये का लेन-देन
नागौर रैकेट 24 गिरफ्तार, 84 खाते
झालावाड़ बरामदगी 53 एटीएम कार्ड, चेकबुक

खुद को और परिवार को कैसे बचाएं

सबसे पहला नियम: अपना बैंक खाता, यूपीआई आईडी या एटीएम कार्ड भूलकर भी किसी अजनबी को न दें। दूसरा: सोशल मीडिया के “आसान कमाई” वाले विज्ञापनों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। तीसरा: अगर कोई कमीशन का लालच देकर खाता मांग रहा है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

अगर किसी संदिग्ध ट्रांजेक्शन का पता चले, तो तुरंत बैंक और पुलिस से संपर्क करें। पुलिस का साफ संदेश है — छोटे लालच में अपना भविष्य बर्बाद न करें। जागरूक रहें, सतर्क रहें और किसी भी संदेह पर तुरंत मदद लें। साइबर अपराध से बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है।

ठगी हो जाए तो तुरंत यहां करें संपर्क

साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930

व्हाट्सएप शिकायत नंबर: 9256001930 या 9257510100

ऑनलाइन पोर्टल: cybercrime.gov.in (राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल)

अगर आपके साथ कोई साइबर फ्रॉड हो गया है या कोई आपका खाता मांग रहा है, तो एक पल भी गंवाए बिना तुरंत इन नंबरों पर संपर्क करें। समय पर शिकायत दर्ज होने से पैसे की रिकवरी और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

8-15 हजार के लालच की असली कीमत: युवाओं का भविष्य दांव पर

इन मामलों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खाता किराए पर देने वाले युवाओं को कई बार सिर्फ 8-15 हजार रुपये का कमीशन मिला, लेकिन बदले में उन्होंने अपना पूरा भविष्य दांव पर लगा दिया। साइबर अपराध के मामले में नाम आते ही बैंक खाता फ्रीज होता है, पुलिस पूछताछ शुरू होती है और मामला दर्ज होने पर आपराधिक रिकॉर्ड बन जाता है — जिसका असर नौकरी के पुलिस वेरिफिकेशन और बैंकिंग भरोसे तक पड़ता है।

ठगों की नौकरी वाले विज्ञापन कैसे पहचानें

साइबर ठगों के विज्ञापनों में कुछ खास पैटर्न दिखते हैं। पहला — काम बेहद आसान और पैसे बहुत ज्यादा: “दिन में 10 मिनट काम, हर हफ्ते 5 हजार कमाएं।” दूसरा — कोई इंटरव्यू या स्किल टेस्ट नहीं, बस बैंक डिटेल्स मांगी जाती हैं। तीसरा — संपर्क सिर्फ टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर होता है, कोई कंपनी का नाम, पता या वेबसाइट नहीं होती।

असली नौकरियों में कभी भी कर्मचारी से उसका बैंक खाता, एटीएम कार्ड या ओटीपी “किराए” पर नहीं मांगा जाता। अगर कोई विज्ञापन खाते की डिटेल के बदले कमीशन दे रहा है, तो समझ लीजिए कि वह खाता किसी अपराध में इस्तेमाल होने वाला है। ऐसे विज्ञापनों की शिकायत भी साइबर पोर्टल पर दर्ज कराई जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

म्यूल अकाउंट क्या होता है?

ऐसा बैंक खाता जिसे साइबर ठग ठगी के पैसे को प्राप्त करने, छिपाने या आगे भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं। खाताधारक को आमतौर पर कमीशन का लालच देकर खाता किराए पर लिया जाता है।

अगर मैंने अनजाने में खाता दे दिया हो तो क्या होगा?

पुलिस के मुताबिक पकड़े जाने पर सबसे पहले गिरफ्तारी खाताधारक की ही होती है, चाहे असली अपराधी कोई और हो। इसलिए तुरंत पुलिस को सूचित करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

ठग आमतौर पर कहां संपर्क करते हैं?

इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “पार्ट-टाइम जॉब”, “गेम फंड” और “घर बैठे आसान कमाई” के विज्ञापनों के जरिए।

शिकायत कहां दर्ज कराएं?

साइबर हेल्पलाइन 1930, व्हाट्सएप 9256001930 / 9257510100, या cybercrime.gov.in पोर्टल पर।

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