SMS Hospital का नया कारनामा: सिर्फ 6 घंटे में 7 मरीजों के 13 जॉइंट रिप्लेसमेंट, जानिए कैसे बना कीर्तिमान

जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी विश्वस्तरीय इलाज संभव है। अस्पताल के अस्थि रोग विभाग के चिकित्सकों ने महज 6 घंटे के भीतर 7 मरीजों के 13 जोड़ प्रतिस्थापन (जॉइंट रिप्लेसमेंट) ऑपरेशन करके नया कीर्तिमान रच दिया, जिसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन ने गुरुवार को साझा की। खास बात यह है कि सभी मरीजों को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत कृत्रिम जोड़ (इम्प्लांट) बिल्कुल मुफ्त मिले, यानी लाखों रुपये के ऑपरेशन का एक भी पैसा मरीजों की जेब से नहीं लगा।

28 सितंबर की सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच हुई इस मैराथन सर्जरी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एक के बाद एक बिना रुकावट सभी ऑपरेशन पूरे किए। सभी मरीजों की हालत स्थिर है और ऑपरेशन के दूसरे ही दिन से उन्होंने चलना भी शुरू कर दिया। यह खबर उन हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जो घुटने या कूल्हे के दर्द से जूझ रहे हैं और पैसे की कमी के कारण ऑपरेशन टालते आ रहे हैं।

6 घंटे, 7 मरीज और 13 ऑपरेशन — कीर्तिमान का पूरा हिसाब

यह अभियान 28 सितंबर को सुबह 8 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चला। इन 6 घंटों में 7 मरीजों के कुल 13 जोड़ बदले गए — यानी कई मरीजों के दोनों घुटने एक ही बार में रिप्लेस किए गए, जिसे बायलेटरल नी रिप्लेसमेंट कहा जाता है। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में जटिल ऑपरेशन पूरे करना असाधारण टीमवर्क और प्लानिंग का नतीजा है।

ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. धाकड़ के अलावा डॉ. मुकेश असवाल, डॉ. क्षितिज अग्रवाल, डॉ. रिपुंजय अग्रवाल, डॉ. प्रमोद, डॉ. युवराज, डॉ. अक्षय और डॉ. सचिन शामिल थे। हर ऑपरेशन के लिए एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम पहले से तैयार थी, ताकि एक मरीज के ऑपरेशन के तुरंत बाद दूसरे की प्रक्रिया शुरू हो सके। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इस तरह के अभियानों के लिए हफ्तों पहले से मरीजों की जांच और इम्प्लांट की व्यवस्था की जाती है।

जॉइंट रिप्लेसमेंट आखिर होता क्या है और किसे जरूरत पड़ती है

आम भाषा में समझें तो जॉइंट रिप्लेसमेंट वह सर्जरी है जिसमें घुटना, कूल्हा या कंधे जैसे क्षतिग्रस्त जोड़ को कृत्रिम जोड़ से बदल दिया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ घुटने के कार्टिलेज घिस जाते हैं — जिसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं — जिससे लगातार दर्द, सूजन और चलने-फिरने में तकलीफ होती है। दवाओं से आराम न मिले तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं।

राजस्थान में बुजुर्गों के बीच घुटने का दर्द बेहद आम समस्या है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। हैरानी की बात यह है कि अधिकतर मरीज दर्द को बुढ़ापे की नियति मानकर सहते रहते हैं और ऑपरेशन से डरते हैं, जबकि आधुनिक तकनीक से यह सर्जरी अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। एसएमएस के मरीजों ने भी ऑपरेशन के दूसरे दिन से चलना शुरू कर दिया, जो इसकी सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

मुफ्त इम्प्लांट: मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना का बड़ा फायदा

इस कीर्तिमान की सबसे खास बात यह है कि सभी 13 ऑपरेशनों में इस्तेमाल इम्प्लांट मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत मुफ्त दिए गए। जॉइंट रिप्लेसमेंट में सबसे बड़ा खर्च इम्प्लांट का ही होता है — प्राइवेट अस्पतालों में एक घुटने के ऑपरेशन का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच जाता है।

एसएमएस अस्पताल जैसे सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों को यह सुविधा बिना किसी खर्च के मिलती है। इसका सीधा मतलब है कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अब यह जटिल सर्जरी पहुंच से बाहर नहीं रही। जिन 7 मरीजों के ऑपरेशन हुए, उन्हें भी इम्प्लांट के लिए एक रुपया नहीं देना पड़ा।

जानकारी विवरण
अस्पताल सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल, जयपुर
विभाग अस्थि रोग विभाग
ऑपरेशन की तिथि 28 सितंबर 2026 (सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक)
कुल ऑपरेशन 13 जॉइंट रिप्लेसमेंट
कुल मरीज 7
इम्प्लांट की लागत मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत मुफ्त
मरीजों की स्थिति सभी स्थिर, ऑपरेशन के दूसरे दिन से चलना शुरू
ऑपरेशन टीम डॉ. धाकड़, डॉ. मुकेश असवाल, डॉ. क्षितिज अग्रवाल, डॉ. रिपुंजय अग्रवाल, डॉ. प्रमोद, डॉ. युवराज, डॉ. अक्षय, डॉ. सचिन

मरीजों के लिए जरूरी जानकारी: एसएमएस में इलाज कैसे कराएं

अगर आप या आपके परिवार में कोई घुटने या कूल्हे के पुराने दर्द से परेशान है, तो एसएमएस अस्पताल के अस्थि रोग विभाग की ओपीडी में जांच कराएं, जहां एक्स-रे के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि ऑपरेशन की जरूरत है या नहीं। आयुष्मान योजना के दस्तावेज (जैसे जन आधार) साथ रखना जरूरी है — पात्र पाए जाने पर इम्प्लांट सहित पूरा इलाज कैशलेस होता है। अब 1 अक्टूबर से लागू विंटर शेड्यूल के अनुसार ओपीडी सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलती है।

सरकारी अस्पतालों की बदलती तस्वीर

एक समय था जब सरकारी अस्पतालों का नाम सुनते ही लोगों के मन में लंबी कतारों की तस्वीर उभरती थी। लेकिन एसएमएस जैसे संस्थानों में इस तरह के रिकॉर्ड लगातार बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक सर्जरी अभियान से ज्यादा से ज्यादा मरीजों को कम समय में इलाज मिलता है, और युवा डॉक्टरों को अनुभवी सर्जनों के साथ सीखने का मौका भी मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. जॉइंट रिप्लेसमेंट में कितना समय लगता है?
आमतौर पर एक जोड़ में 1-2 घंटे लगते हैं, लेकिन एसएमएस की टीम ने 6 घंटे में 13 ऑपरेशन पूरे किए — यह बेहतरीन टीमवर्क और पहले से की गई तैयारी का नतीजा है।

2. क्या एसएमएस में जॉइंट रिप्लेसमेंट मुफ्त होता है?
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के पात्र मरीजों के लिए इम्प्लांट सहित पूरा इलाज मुफ्त होता है। इस अभियान के सभी 7 मरीजों को भी इम्प्लांट निःशुल्क मिले।

3. ऑपरेशन के बाद मरीज कितने दिन में चल पाता है?
आधुनिक तकनीक से मरीज आमतौर पर दूसरे या तीसरे दिन से सहारे के साथ चलना शुरू कर देते हैं। एसएमएस के इन मरीजों ने भी दूसरे दिन से चलना शुरू कर दिया था।

4. एसएमएस में जोड़ों के दर्द की जांच कहां कराएं?
अस्थि रोग विभाग की ओपीडी में। अब विंटर शेड्यूल के तहत ओपीडी सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलती है। आयुष्मान योजना के दस्तावेज साथ ले जाना न भूलें।

यह खबर न सिर्फ एक मेडिकल कीर्तिमान है, बल्कि जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए उम्मीद का संदेश भी है। एसएमएस की इस टीम ने दिखा दिया कि सही टीमवर्क और सरकारी योजनाओं के इस्तेमाल से बड़ी से बड़ी चुनौती पार की जा सकती है।

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