रातभर धरना, पूर्व मुख्यमंत्री का कमिश्नरेट पहुंचना और अब पूरे प्रदेश से कार्यकर्ताओं के जयपुर कूच का ऐलान — रितु बराला एफआईआर विवाद ने राजस्थान की सियासत में एक ही रात में आग लगा दी है।
रितु बराला एफआईआर विवाद: कमिश्नरेट के बाहर रातभर का धरना
सोमवार शाम को शुरू हुआ ये धरना पूरी रात चला। डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया। डोटासरा ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि एफआईआर दर्ज कराना पुलिस की मेहरबानी नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता का अधिकार है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से फोन पर बात करके भी शिकायत पर कार्रवाई की मांग रखी।
धरने में शामिल नेताओं की सूची खुद इस आंदोलन की गंभीरता बताती है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, विधायक रफीक खान, विधायक अमीन कागजी, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और पूर्व विधायक वेद प्रकाश सोलंकी — सब रातभर कमिश्नरेट में ही डटे रहे। सबसे बड़ा सरप्राइज तब आया जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर से सीधे जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए।
डोटासरा का आरोप साफ था — पुलिस मामले में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों में एफआईआर दर्ज हो रही है, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में नहीं की जा रही। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा — “राजस्थान की बेटी को न्याय दिलाकर रहेंगे… जब तक रितु बराला की FIR दर्ज नहीं होती, न कांग्रेस पीछे हटेगी, न न्याय की आवाज़ दबेगी।”
मामला शुरू कहां से हुआ? दिल्ली के प्रदर्शन से जयपुर तक की कहानी
इस पूरे विवाद की जड़ दिल्ली में है। रितु बराला हाल ही में दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। रितु का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
घटना के बाद रितु ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। कांग्रेस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा को फोन कर रितु के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कदम उठाने को कहा था। इसके बाद डोटासरा रितु को साथ लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे।
यानी पहले दिल्ली में हुआ कथित दुर्व्यवहार, फिर राहुल गांधी से मुलाकात, फिर फोन पर निर्देश और आखिर में जयपुर कमिश्नरेट का धरना — ये पूरी कड़ी एक के बाद एक जुड़ती गई और सोमवार रात को विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गई।
‘जीरो FIR’ पर अड़ी कांग्रेस — क्या है पूरा मामला
कांग्रेस की मांग तकनीकी रूप से ‘जीरो एफआईआर’ की है। जीरो एफआईआर का मतलब होता है कि पीड़ित किसी भी थाने या पुलिस इकाई में शिकायत दर्ज करा सकता है, चाहे घटना किसी दूसरे राज्य या क्षेत्राधिकार में हुई हो। पुलिस को शिकायत दर्ज करके उसे संबंधित क्षेत्र के थाने को ट्रांसफर करना होता है। रितु बराला का आरोप दिल्ली पुलिस के खिलाफ है, इसलिए जयपुर पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करके उसे दिल्ली भेजना होगा — यही कांग्रेस की मांग है।
लेकिन जयपुर पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। डोटासरा ने चेतावनी दी कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, कांग्रेस का धरना जारी रहेगा — जरूरत पड़ने पर मामला पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक ले जाया जाएगा।
दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस इस मामले में दो मोर्चों पर लड़ रही है — एक तरफ दिल्ली पुलिस के कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा है, और दूसरी तरफ राजस्थान पुलिस की कथित निष्क्रियता का। इससे पहले भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरवाड़ थाने के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था — सरवाड़ में कांग्रेस का हंगामा उस वक्त की बड़ी खबर बनी थी।
अब आगे क्या होगा: जयपुर कूच और कमिश्नरेट घेराव की चेतावनी
रातभर धरने के बाद कांग्रेस ने अगला कदम उठा दिया है। एआईसीसी ने जयपुर कूच का ऐलान कर दिया है — यानी पूरे राजस्थान से कांग्रेस कार्यकर्ता जयपुर पहुंचेंगे। डोटासरा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तो मंगलवार को पूरे राजस्थान के कांग्रेस कार्यकर्ता जयपुर पहुंचकर पुलिस कमिश्नरेट का घेराव करेंगे और हर हाल में एफआईआर दर्ज कराकर रहेंगे।
डोटासरा पहले भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं — SMS अस्पताल आग हादसे में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी — और चुनाव आयोग के खिलाफ भी पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है।
घटनाक्रम: एक नजर में
| समय | घटना |
|---|---|
| हाल ही में (दिल्ली) | चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में रितु बराला पर दिल्ली पुलिस के कर्मियों द्वारा मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप |
| इसके बाद | रितु बराला की कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात |
| 19 अक्टूबर | राहुल गांधी ने डोटासरा को फोन कर रितु के साथ FIR कराने के निर्देश दिए |
| 19 अक्टूबर (शाम) | डोटासरा रितु को साथ लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे; धरना शुरू |
| 19-20 अक्टूबर (रात) | डोटासरा समेत नेता रातभर धरने पर; पूर्व CM अशोक गहलोत भी पहुंचे; FIR दर्ज नहीं हुई |
| 20 अक्टूबर (सुबह) | कांग्रेस/AICC का जयपुर कूच का ऐलान; कमिश्नरेट घेराव की चेतावनी |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रितु बराला कौन हैं?
रितु बराला एनएसयूआई (कांग्रेस की छात्र इकाई) की कार्यकर्ता हैं। उनका आरोप है कि दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
जीरो FIR क्या होती है और कांग्रेस इसकी मांग क्यों कर रही है?
जीरो एफआईआर का मतलब है कि पीड़ित किसी भी थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है, चाहे घटना किसी दूसरे राज्य में हुई हो। पुलिस को शिकायत दर्ज करके उसे संबंधित क्षेत्र के थाने को ट्रांसफर करना होता है। रितु का आरोप दिल्ली पुलिस के खिलाफ है, इसलिए कांग्रेस जयपुर पुलिस से जीरो FIR दर्ज करने की मांग कर रही है।
कांग्रेस ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा रितु बराला को साथ लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे और रातभर धरना दिया। धरने में पूर्व मंत्री, विधायक और पूर्व CM अशोक गहलोत भी शामिल हुए। अब कांग्रेस ने जयपुर कूच का ऐलान किया है।
आगे क्या हो सकता है?
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर FIR दर्ज नहीं हुई तो मंगलवार को पूरे राजस्थान के कार्यकर्ता जयपुर पहुंचकर पुलिस कमिश्नरेट का घेराव करेंगे। डोटासरा ने जरूरत पड़ने पर DGP तक मामला ले जाने की बात भी कही है।
स्रोत: अमर उजाला