| कुल लक्ष्य (बेटियां) | 7.24 लाख |
| 17 अक्टूबर 2026 तक टीकाकरण | 5,20,087 (71.8%) |
| 16 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच नया टीकाकरण | 2,15,704 |
| अगस्त 2026 तक की स्थिति | 2.75 लाख (17वां स्थान) |
| अक्टूबर 2026 में राष्ट्रीय रैंक | चौथा स्थान |
| 100% लक्ष्य की नई समय सीमा | 31 अक्टूबर 2026 |
सत्रहवें से चौथे स्थान तक की छलांग — और वह भी सिर्फ एक महीने में। राजस्थान ने HPV टीकाकरण में जो कमाल दिखाया है, वह स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में एक नया अध्याय है। 17 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश में 5,20,087 बेटियों को HPV टीका लग चुका है, यानी लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सिर्फ 16 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच ही 2,15,704 बेटियों ने यह टीका लगवाया — यानी एक महीने में इतना काम हुआ, जितना इससे पहले कई महीनों में नहीं हो पाया था।
राजस्थान HPV टीकाकरण में अब देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। पहले तीन स्थानों पर उत्तर प्रदेश (27.5 लाख टीके), बिहार (11.5 लाख टीके) और मध्य प्रदेश (7.6 लाख टीके) हैं। राजस्थान के लिए यह उपलब्धि खास इसलिए है क्योंकि अगस्त 2026 तक राज्य 17वें पायदान पर था और सिर्फ 2.75 लाख बेटियों तक टीका पहुंच पाया था। फिर स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों, पंचायतों और जिलों के स्तर पर ऐसा समन्वित अभियान चलाया कि आंकड़े ही बदल गए।
एक महीने में 2.15 लाख — आंकड़ों में अभियान की कहानी
राजस्थान HPV टीकाकरण अभियान के आंकड़े खुद बताते हैं कि पिछले एक महीने में क्या बदला। ऊपर दी गई तालिका से समझिए कि कहां से कहां पहुंचा प्रदेश।
एक महीने में 2.1 लाख से ज्यादा बेटियों का टीकाकरण कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। इसका मतलब है कि रोजाना औसतन करीब सात हजार बेटियां टीका लगवाने आगे आईं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों के जरिए अभियान तेज किया गया, ग्रामीण इलाकों में आउटरीच टीकाकरण सत्र लगाए गए और जिला स्तर पर रोजाना निगरानी की गई।
पांच जिलों की कमाल की उपलब्धि — डीग ने किया 100% पूरा
इस अभियान में प्रदेश के कुछ जिलों ने तो कमाल ही कर दिया। पांच जिले 90 प्रतिशत से ज्यादा कवरेज हासिल कर चुके हैं। इनमें डीग ने अपना लक्ष्य 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसके बाद सिरोही में 94 प्रतिशत, अलवर में 93 प्रतिशत, टोंक में 90.9 प्रतिशत और जालोर में 90.1 प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में HPV टीकाकरण को प्राथमिकता दी गई थी, जिसके बाद जिलों में मिशन-मोड पर काम शुरू हुआ। जिला स्तर पर पात्र बेटियों की पहचान, प्रभावी सत्र योजना और नियमित समीक्षा ने इस रफ्तार को बनाए रखा।
टीका क्यों जरूरी — 14 साल की उम्र में एक खुराक, जीवनभर का कवच
HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस का टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर कैंसर है, जो बाद के वर्षों में HPV के कुछ खतरनाक स्ट्रेन से हो सकता है। अच्छी खबर यह है कि समय पर टीका लगवा लेने से इस खतरे को बड़ी हद तक टाला जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, 14 साल की उम्र में लगने वाली एक खुराक ही पर्याप्त सुरक्षा देती है। अभियान में 9 से 14 साल की आयु वर्ग की बेटियों को लक्षित किया गया है। टीका सुरक्षित और प्रभावी है — विभाग लगातार अपील कर रहा है कि मिथकों और डर से बेटियों को इस सुरक्षा कवच से दूर न रखें।
यही वजह है कि कैंसर जागरूकता सत्र जैसे कार्यक्रमों को भी स्वास्थ्य विभाग महत्व दे रहा है — समय पर जानकारी ही बेटियों के भविष्य को सुरक्षित कर सकती है।
फरवरी 2026 में शुरू हुआ सफर — कैसे बदली तस्वीर
राष्ट्रीय HPV टीकाकरण अभियान की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी। 28 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजमेर से इस अभियान का शुभारंभ किया था, जिसका लक्ष्य 9 से 14 वर्ष की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सुरक्षा कवच देना था।
शुरुआत में राजस्थान की रफ्तार धीमी थी। मई तक भी कई जिले लक्ष्य से काफी पीछे थे और गर्मियों की छुट्टियों ने काम और धीमा कर दिया था। अगस्त तक राज्य 17वें स्थान पर था। लेकिन सितंबर में विभाग ने नई रणनीति अपनाई — स्कूलों के जरिए सीधे पात्र बेटियों तक पहुंच, पंचायती राज विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग का सहयोग, और घर-घर तक पहुंचा अभियान।
इस समन्वित प्रयास का नतीजा सामने है: 16 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच 2.15 लाख नए टीकाकरण और 17वें से सीधे चौथे स्थान की छलांग। नवरात्र के पावन अवसर पर, जब पूरा प्रदेश बेटियों की आराधना में मग्न था, विभाग ने जीवन सुरक्षा कवच बांधने का काम भी पूरे जोश से किया।
तीन बार छूटा लक्ष्य, अब 31 अक्टूबर की नई डेडलाइन
तस्वीर का दूसरा पहलू भी जानिए। स्वास्थ्य विभाग 100 प्रतिशत कवरेज की समय सीमा पहले तीन बार चूक चुका है। सितंबर में नए निर्देश जारी किए गए कि 31 अक्टूबर तक पूरा लक्ष्य हासिल करना होगा। इसके लिए जिलों को पात्र बेटियों की पहचान, प्रभावी सत्र योजना और नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। चुनौती यह है कि दूरदराज के क्षेत्रों में जागरूकता अब भी कम है।
टीके के बारे में भ्रांतियां और सच्चाई
अभियान के दौरान सबसे बड़ी बाधा अफवाहें और मिथक रहे हैं। कुछ अभिभावकों के मन में टीके की सुरक्षा को लेकर सवाल हैं, तो कुछ को लगता है कि उनकी बेटी को इसकी जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी चिंताओं को स्पष्ट किया है:
टीका पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से परखा हुआ है
14 साल की उम्र में एक खुराक ही पर्याप्त सुरक्षा देती है
यह टीका कैंसर होने से पहले रोकता है — इलाज नहीं, बचाव है
समय पर टीका न लगवाने पर बाद में जोखिम बढ़ सकता है
स्कूलों में अभिभावकों और शिक्षकों को भी अभियान से जोड़ा गया है, ताकि जागरूकता की कमी ही लड़ाई न बने।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: राजस्थान HPV टीकाकरण में कितनी बेटियों को टीका लग चुका है?
उत्तर: 17 अक्टूबर 2026 तक राजस्थान में 5,20,087 बेटियों को HPV टीका लग चुका है, जो 7.24 लाख के कुल लक्ष्य का करीब 71.8 प्रतिशत है। एक महीने में 2,15,704 नए टीकाकरण हुए।
प्रश्न: HPV टीका किस उम्र की बेटियों के लिए है?
उत्तर: यह अभियान 9 से 14 साल की आयु वर्ग की बेटियों के लिए है। 14 साल की उम्र में एक खुराक ही पर्याप्त सुरक्षा देती है।
प्रश्न: राजस्थान HPV टीकाकरण में राष्ट्रीय स्तर पर कौन से स्थान पर है?
उत्तर: राजस्थान अब देश में चौथे स्थान पर है। इससे आगे उत्तर प्रदेश (27.5 लाख), बिहार (11.5 लाख) और मध्य प्रदेश (7.6 लाख) हैं। अगस्त में राजस्थान 17वें स्थान पर था।
प्रश्न: टीका कहां और कैसे लगवाया जा सकता है?
उत्तर: स्कूलों के माध्यम से, ग्रामीण इलाकों में आउटरीच टीकाकरण सत्रों में और जिला स्वास्थ्य केंद्रों पर यह टीका लगाया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या स्कूल से संपर्क करें।
आगे का रास्ता — 31 अक्टूबर का लक्ष्य और आपका हिस्सा
राजस्थान HPV टीकाकरण अभियान अब निर्णायक चरण में है। 71.8 प्रतिशत काम हो चुका है, लेकिन बची हुई करीब 2 लाख पात्र बेटियों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती है। विभाग ने स्कूलों, आंगनबाड़ियों और स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए अंतिम चरण की रणनीति तैयार की है।
यदि आपकी बेटी या पड़ोस की बेटी 9 से 14 साल की है और अभी तक टीका नहीं लगवाया, तो यह समय है आगे आने का। एक खुराक, जीवनभर की सुरक्षा — राजस्थान ने दिखा दिया है कि 17वें से चौथे स्थान का सफर एक महीने में तय हो सकता है। अब बारी है मिशन को मुकाम तक पहुंचाने की।