फ्लैट की कीमत का 97 फीसदी — पूरे 26 लाख 76 हजार 798 रुपए — चुकाने के बाद भी 6 साल तक चाबी का इंतजार। बिल्डर हर बार नया बहाना: कभी नोटबंदी, कभी जीएसटी, कभी कोरोना। अब इस टालमटोल पर RAJ-RERA रिफंड आदेश ने पूर्णविराम लगा दिया है। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की जयपुर पीठ ने प्रमोटर को आदेश दिया है — पूरी रकम 10.80 फीसदी सालाना ब्याज के साथ 45 दिन के भीतर लौटानी होगी, कोई मोहलत नहीं मिलेगी।
यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद है जो अधूरे प्रोजेक्टों में पैसा फंसाकर सालों से चक्कर काट रहे हैं। समझते हैं पूरा मामला और आपके काम की बातें।
RAJ-RERA रिफंड आदेश की 5 बड़ी बातें
1. पूरी रकम वापस, कोई कटौती नहीं: प्रमोटर वीपी स्पेसेस प्राइवेट लिमिटेड को आवंटी अजीतइंदर कौर सिंह के जमा 26,76,798 रुपए पूरे लौटाने होंगे — एक रुपए की कटौती की इजाजत नहीं।
2. हर किस्त पर 10.80% सालाना ब्याज: ब्याज हर जमा तिथि से वास्तविक भुगतान तक जुड़ेगा — 2014 की किस्त पर 12 साल का ब्याज अपने आप लाखों में पहुंच जाएगा।
3. सिर्फ 45 दिन की मोहलत: आदेश अपलोड होने के 45 दिनों में भुगतान अनिवार्य, और 15 दिनों में अनुपालना रिपोर्ट पेश करनी होगी ताकि रेरा निगरानी रख सके।
4. मोरेटोरियम की मांग खारिज: बिल्डर ने भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। रेरा पीठ ने साफ इनकार कर दिया — “थोड़ा और वक्त” अब नहीं चलेगा।
5. ‘लैप्स’ प्रोजेक्ट का बहाना नहीं चलेगा: रेरा की दो-टूक व्यवस्था — जब प्रोजेक्ट आधिकारिक पोर्टल पर ‘लैप्स’ श्रेणी में पड़ा हो, तो प्रमोटर का कोई बहाना मान्य नहीं। खरीदार को अंतहीन इंतजार के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
2014 से 2026: 12 साल की पूरी कहानी एक नजर में
| साल / तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 2014–2017 | 15 किस्तों में कुल 26,76,798 रुपए चुकाए — फ्लैट की कीमत का 97% |
| 31 दिसंबर 2016 | एग्रीमेंट फॉर सेल; फ्लैट B-602 (टावर-B) 27.60 लाख में बुक |
| 2017 | प्रोजेक्ट ‘ग्रैंड्योर’ रेरा में पंजीकृत (RAJ/P/2017/124) |
| 31 दिसंबर 2020 | अनुबंध के मुताबिक वैध कब्जे की अंतिम तिथि — कब्जा नहीं मिला |
| 2022 | बिल्डर का दावा: टावर-B का काम पूरा, सीसी मिल गया |
| 2026 | रेरा पोर्टल पर प्रोजेक्ट ‘लैप्स’; ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट का कोई प्रमाण नहीं |
| 18 अक्टूबर 2026 | रेरा सदस्य रश्मि गुप्ता की पीठ का फैसला — 10.80% ब्याज सहित 45 दिन में रिफंड |
ध्यान दीजिए — खरीदार ने 2014 में किस्तें देनी शुरू कीं, जबकि एग्रीमेंट 2016 के आखिर में हुआ। भरोसे के नाम पर पैसा पहले लिया गया, कागज बाद में बने — और कब्जा कभी मिला ही नहीं।
बिल्डर के 5 बहाने, रेरा ने एक-एक करके खारिज किए
“टावर का काम पूरा, 2022 में सीसी मिल गया” — वकील अविरल गोयल की दलील: प्रमोटर के पास OC ही नहीं, और बिना OC कब्जा वैध नहीं होता। बिल्डर का कथित सर्टिफिकेट न पोर्टल पर अपलोड था, न किसी सक्षम निकाय से प्रमाणित।
“नोटबंदी-जीएसटी से देरी हुई” — रेरा का जवाब: 2016-17 की घटनाओं को 2020 की डेडलाइन चूकने और उसके बाद 6 साल तक कब्जा न देने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
“कोविड ने काम रोका” — कुछ महीनों की रुकावट समझी जा सकती है, लेकिन 2020 के बाद के वर्षों का हिसाब इससे नहीं मिलता।
“बजरी बैन और लेआउट मंजूरी अटकी” — प्रशासनिक दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन इसका खामियाजा खरीदार क्यों भुगते? जोखिम का बोझ प्रमोटर पर है।
“प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है” — सबसे करारा जवाब: आधिकारिक पोर्टल पर प्रोजेक्ट ‘लैप्स’ पड़ा है। सरकारी रिकॉर्ड जब डिफॉल्ट कह रहा हो, तो “काम चल रहा है” हवा-हवाई दावा है।
भिवाड़ी का ग्रैंड्योर प्रोजेक्ट आज किस हाल में
‘ग्रैंड्योर’ भिवाड़ी के अलवर बाईपास रोड पर बीबीपुर-बनबीरपुर इलाके में है — करीब 3 एकड़ में 5 टावर और कुल 658 यूनिट प्रस्तावित हैं। रेरा पंजीकरण RAJ/P/2017/124 आज भी पोर्टल पर देखा जा सकता है।
सबक साफ है — रेरा पंजीकरण ही काफी नहीं, प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति (सक्रिय या लैप्स) पोर्टल पर जरूर जांचें। अथॉरिटी अब सख्त मूड में है: विवासिटी मॉल मामले में 6.13 करोड़ का मनमाना बिल रद्द हुआ था और शिवशक्ति रियलहोम को डिफॉल्टर घोषित किया गया था।
आपके काम की बात: RAJ-RERA रिफंड आदेश से मिलने वाले 5 सबक
1. पहले पोर्टल पर स्थिति जांचें: reraapp.rajasthan.gov.in पर पंजीकरण नंबर डालकर देखें — प्रोजेक्ट सक्रिय है या ‘लैप्स’। लैप्स श्रेणी में आपका पक्ष और मजबूत हो जाता है।
2. दस्तावेज संभालकर रखें: एग्रीमेंट फॉर सेल, हर किस्त की रसीद, बिल्डर से पत्राचार — यही सबसे बड़ी ताकत है। इस केस में 15 किस्तों की रसीदों ने ही 97% भुगतान साबित किया।
3. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: RAJ-RERA पोर्टल पर शिकायत ऑनलाइन दाखिल होती है। देरी पर दो राहत मांग सकते हैं — ब्याज सहित रिफंड, या देरी की अवधि का ब्याज लेकर फ्लैट का कब्जा।
4. ब्याज का गणित समझें: रेरा आमतौर पर SBI की उच्चतम MCLR से 2% अधिक ब्याज दिलाता है — यहां 10.80% सालाना बैठी। हर जमा तिथि से ब्याज जुड़ता है, इसलिए पुरानी किस्तों पर रकम काफी बढ़ जाती है।
5. OC जरूर मांगें: बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कब्जा वैध नहीं — न स्थायी बिजली-पानी कनेक्शन, न पूरी रजिस्ट्री। “कब्जा ले लीजिए, कागज बाद में” पर सतर्क रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: RAJ-RERA में कौन शिकायत कर सकता है? जवाब: कोई भी आवंटी — जिसने रेरा-पंजीकृत प्रोजेक्ट में फ्लैट, प्लॉट या दुकान बुक की हो। घर खरीदार ही नहीं, कमर्शियल संपत्ति के खरीदार भी उतने ही अधिकार रखते हैं, जैसा विवासिटी मॉल के फैसले में साबित हुआ।
सवाल 2: RAJ-RERA रिफंड आदेश में ब्याज दर कैसे तय होती है? जवाब: आमतौर पर SBI की उच्चतम MCLR दर से 2 प्रतिशत अधिक। इस मामले में 10.80% सालाना तय हुई, जो हर जमा तिथि से वास्तविक भुगतान तक लागू रहेगी।
सवाल 3: 45 दिन में बिल्डर ने पैसा न लौटाया तो क्या होगा? जवाब: आदेश की अवहेलना पर रेरा के पास सख्त अधिकार हैं — जुर्माना, संपत्ति कुर्क कर वसूली और प्रमोटर पर आगे की कानूनी कार्रवाई। 15 दिन में अनुपालना रिपोर्ट न देने पर अथॉरिटी स्वतः संज्ञान ले सकती है।
सवाल 4: क्या बिना OC के फ्लैट का कब्जा लेना सही है? जवाब: बिल्कुल नहीं। बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कब्जा वैध नहीं होता। इस फैसले में रेरा ने इसी आधार पर बिल्डर के “काम पूरा है” वाले दावे को खारिज कर दिया।
97% पैसा देकर 6 साल इंतजार करने वाली खरीदार की जीत बताती है — सही मंच, सही दस्तावेज और धैर्य हो, तो कानून खरीदार के साथ खड़ा है।