राजकोट सोना लूट हत्याकांड: सिरोही नाकाबंदी में 4 आरोपी धरे, 1.55 करोड़ का सोना बरामद
गुजरात के राजकोट में दिनदहाड़े गोलीबारी करके सोना लूटने और एक कर्मचारी की हत्या करने वाले चारों बदमाश राजस्थान पुलिस के जाल में फंस गए हैं। राजकोट सोना लूट हत्याकांड के ये आरोपी वारदात के बाद गुजरात से भागकर राजस्थान की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन सिरोही जिले की पिंडवाड़ा पुलिस ने पहले से बिछाई गई नाकाबंदी में उन्हें धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में वही शूटर भी शामिल है जिसने लूट का विरोध करने पर गोली चलाई थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटा गया सोना-चांदी भी बरामद कर लिया है। सभी आरोपियों को अब गुजरात की राजकोट पुलिस को सौंप दिया गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ होगी।
इस पूरी कार्रवाई को राजस्थान और गुजरात पुलिस के बीच बेहतर समन्वय का नतीजा माना जा रहा है। उदयपुर रेंज के अधिकारियों की निगरानी में हुई इस कार्रवाई में सूचना तंत्र, त्वरित नाकाबंदी और सटीक रणनीति की अहम भूमिका रही। जानिए पूरी घटना का सिलसिला, आरोपी कौन हैं और अब आगे क्या होगा।
राजकोट में 14 अक्टूबर को आखिर हुआ क्या था?
घटना गुजरात के राजकोट शहर की है, जहां एक सोना-चांदी के आभूषण निर्माण करने वाली फर्म से कर्मचारी लालजीभाई सुरक्षा गार्ड के साथ 14 अक्टूबर को करीब 1.55 करोड़ रुपये मूल्य का सोना लेकर रिफाइनरी से बाहर निकले थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी दो हथियारबंद बदमाशों ने सोने से भरा थैला लूटने की कोशिश की।
लालजीभाई ने जब विरोध किया तो एक बदमाश ने हथियार से फायरिंग कर दी। गोली लगने से लालजीभाई घायल होकर गिर पड़े। इसके बाद आरोपी थैला लेकर मरून रंग की टाटा टेगोर कार में सवार होकर फरार हो गए। उपचार के दौरान लालजीभाई की मौत हो गई, जिससे यह मामला लूट के साथ-साथ हत्या का भी बन गया।
वारदात के बाद राजकोट में सनसनी फैल गई। बताया गया है कि घटना को लेकर स्थानीय सोनी बाजार में हड़ताल जैसी स्थिति बनने से मामले ने और तूल पकड़ लिया। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बदमाश अंतरराज्यीय सीमा पार करके भागने की फिराक में थे।
सिरोही पुलिस ने कैसे बिछाया जाल?
घटना की गंभीरता को देखते ही राजस्थान पुलिस सतर्क हो गई। सिरोही के एसपी डॉ. अजय सिंह राठौड़ और एडिशनल एसपी नरेंद्र कुमार के निर्देश पर पिंडवाड़ा थाने के पुलिसकर्मियों ने सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख रास्तों पर नाकाबंदी शुरू कर दी। पुलिस को अंदेशा था कि आरोपी राजस्थान की ओर भागने की कोशिश करेंगे।
इसी दौरान उदयपुर की ओर जा रही एक संदिग्ध कार पुलिस की नजर में आई। पुलिस ने जब पीछा किया तो कार सवार आरोपी वाहन छोड़कर भागने लगे। लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चारों आरोपियों को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों ने राजकोट में सोना-चांदी लूट की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली।
पकड़े गए चारों आरोपी कौन हैं?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
| नाम | उपनाम | पहचान |
|---|---|---|
| शिवम पांडे | आयुष चतुर्वेदी | आरोपी |
| अजीत पांडे | लालू | आरोपी |
| अभिषेक सिंह | लंकेश | आरोपी |
| मनोहर सिंह | — | आरोपी |
सभी चारों आरोपी उत्तर प्रदेश के निवासी बताए गए हैं। इनमें वारदात को अंजाम देने वाला शूटर भी शामिल है, यानी वह व्यक्ति भी पुलिस की गिरफ्त में है जिसने लालजीभाई पर गोली चलाई थी। कार्रवाई उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव की निगरानी में की गई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटा गया सोना-चांदी बरामद कर लिया है।
अब आगे क्या होगा?
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को गुजरात की राजकोट पुलिस को सौंप दिया गया है। अब राजकोट पुलिस इनसे गहन पूछताछ करेगी। जांच का दायरा सिर्फ इस एक वारदात तक सीमित नहीं रहेगा — पुलिस यह भी पता लगाएगी कि क्या ये आरोपी पहले भी इसी तरह की वारदातों में शामिल रहे हैं, हथियार कहां से आए और इस पूरी साजिश में और कौन-कौन शामिल था।
बरामद किया गया सोना-चांदी मुकदमे में अहम साक्ष्य के रूप में काम आएगा। कानूनी प्रक्रिया के तहत यह माल जब्त रहेगा और अदालत के आदेश पर ही उसका निस्तारण होगा।
अंतरराज्यीय अपराधों पर नकेल क्यों जरूरी है?
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंतरराज्यीय अपराधी वारदात के बाद एक राज्य से दूसरे राज्य में भागकर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। गुजरात-राजस्थान सीमा के रास्ते अपराधियों के लिए भागने का आसान जरिया बन जाते हैं। ऐसे में सीमावर्ती जिलों की पुलिस के बीच तत्काल सूचना साझा करना और नाकाबंदी का समन्वय सबसे अहम हथियार साबित होता है।
राजस्थान पुलिस पहले भी कई अंतरराज्यीय मामलों में त्वरित कार्रवाई कर चुकी है। जैसे उदयपुर में हाल ही में करोड़ों की अवैध गांजा खेती पर हुई बड़ी कार्रवाई में भी एजेंसियों के समन्वय ने बड़ी कामयाबी दिलाई थी। इसी तरह कोटा में हुई सड़क दुर्घटना के बाद पुलिस की त्वरित जांच ने दिखाया था कि सतर्कता से बड़े मामलों का जल्द खुलासा संभव है।
आम लोगों के लिए भी इस घटना से एक सीख है — सोना-चांदी जैसी कीमती चीजों के परिवहन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम जरूरी हैं, और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: राजकोट में आखिर हुआ क्या था?
उत्तर: 14 अक्टूबर को राजकोट में दो हथियारबंद बदमाशों ने एक आभूषण फर्म के कर्मचारी लालजीभाई से करीब 1.55 करोड़ रुपये का सोना लूटने की कोशिश की। विरोध करने पर एक बदमाश ने गोली चला दी। उपचार के दौरान लालजीभाई की मौत हो गई।
प्रश्न: चारों आरोपी कौन हैं और कहां पकड़े गए?
उत्तर: आरोपी हैं — शिवम पांडे उर्फ आयुष चतुर्वेदी, अजीत पांडे उर्फ लालू, अभिषेक सिंह उर्फ लंकेश और मनोहर सिंह। सभी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। इन्हें सिरोही जिले की पिंडवाड़ा पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान पकड़ा।
प्रश्न: क्या लूटा गया सोना मिल गया?
उत्तर: हां, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटा गया सोना-चांदी बरामद कर लिया है। यह मुकदमे में अहम साक्ष्य के रूप में काम आएगा।
प्रश्न: आरोपियों के साथ अब क्या होगा?
उत्तर: सभी चारों आरोपियों को गुजरात की राजकोट पुलिस को सौंप दिया गया है। राजकोट पुलिस इनसे गहन पूछताछ करेगी और लूट-हत्या के मुकदमे में आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।