खाद की कालाबाजारी और जबरन टैगिंग पर लगेगी लगाम: राजस्थान में DAP-यूरिया अब बिना शर्त मिलेगा, 13 अक्टूबर की बैठक में 5 बड़े फैसले

रबी सीजन की बुवाई के बीच राजस्थान के किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। खाद की दुकानों पर चल रही “साथ में ये भी लो” वाली जबरन टैगिंग और कालाबाजारी की शिकायतों पर कृषि विभाग ने अब सीधा एक्शन लिया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को जयपुर में हुई राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में साफ कह दिया गया कि किसानों को यूरिया और डीएपी के साथ कोई अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती को लेकर अधिकारियों को जिलेवार निगरानी और तुरंत कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं।

बैठक की अध्यक्षता कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल और राजफैड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संयुक्त रूप से की। इसमें प्रदेशभर में उर्वरकों की उपलब्धता, आवंटन, आपूर्ति और वितरण व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा हुई। किसानों के लिहाज से सबसे अहम बात यह है कि अब खाद खरीदते समय कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगेगी — जो खाद चाहिए, वही निर्धारित दाम पर मिलेगी।

खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती: बैठक के 5 बड़े फैसले

समीक्षा बैठक में जिन फैसलों पर मुहर लगी, उनका सीधा असर खेत तक पहुंचेगा। पहला फैसला टैगिंग पर पूर्ण रोक का है — यूरिया या डीएपी के साथ नैनो उर्वरक या कोई अन्य उत्पाद थोपा नहीं जा सकेगा। दूसरा फैसला जिलेवार आवंटन का है, ताकि किसी जिले में खाद की कृत्रिम कमी न बने। तीसरा फैसला निर्धारित दरों पर बिक्री की सख्त निगरानी का है। चौथा फैसला आपूर्ति से लेकर अंतिम वितरण तक हर स्तर पर निगरानी और अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई का है। पांचवां फैसला किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने का है, ताकि जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने की आदत बदले।

खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती: जबरन टैगिंग पर रोक

खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती का सबसे व्यावहारिक पहलू यही है। अक्सर रबी सीजन में दुकानदार डीएपी या यूरिया देते समय नैनो डीएपी, नैनो यूरिया या कोई अन्य उत्पाद साथ में खरीदने की शर्त रख देते हैं। बैठक में साफ किया गया कि नैनो उर्वरकों की खरीद के लिए किसानों पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा।

अगर कोई विक्रेता अब भी टैगिंग करता है या निर्धारित दर से ज्यादा दाम मांगता है, तो किसान शिकायत कर सकते हैं। सभी जिलों में कृषि विभाग के कंट्रोल रूम स्थापित हैं, जहां उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण की निरंतर निगरानी हो रही है। उर्वरक वितरण कृषि विभाग के कार्मिकों की मौजूदगी में करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

कालाबाजारी और डायवर्जन पर कड़ी नजर

बैठक में कालाबाजारी रोकने को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि किसानों के लिए आवंटित उर्वरकों का उपयोग सिर्फ कृषि कार्यों में ही होना चाहिए। अवैध भंडारण, गैर-कृषि कार्यों में डायवर्जन और कालाबाजारी रोकने के लिए अधिकारी विशेष सतर्कता बरतें — खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती का मतलब है कि गड़बड़ी करने वालों पर तुरंत कार्रवाई होगी।

राजफैड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी ने कहा कि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें। उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों को निर्धारित आवंटन के अनुसार समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने और जिला स्तर पर अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने को कहा गया है।

जिलेवार आवंटन: आपके जिले तक खाद कैसे पहुंचेगी

कृषि आयुक्त ने निर्देश दिए कि यूरिया और डीएपी का जिलेवार आवंटन वास्तविक खपत, फसलों की जरूरत और मांग के आधार पर किया जाए। जिस जिले में रबी की बुवाई ज्यादा है, वहां आवंटन भी उसी अनुपात में होगा — किसी भी जिले में खाद की अनावश्यक कमी नहीं होने दी जाएगी। निकटतम वितरण केंद्रों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती का फायदा हर गांव तक पहुंचे।

बैठक में कृषि विभाग के खंडीय एवं जिला स्तरीय अधिकारी, सहकारिता विभाग के जिला अधिकारी तथा यूरिया-डीएपी आपूर्ति करने वाली कंपनियों के राज्य स्तरीय अधिकारी शामिल हुए। यानी फैसला सिर्फ कागज पर नहीं, आपूर्ति श्रृंखला के हर स्तर तक पहुंचाया गया है।

संतुलित उर्वरक उपयोग: पैदावार भी, मिट्टी भी

बैठक में संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी जोर दिया गया। कृषि आयुक्त ने कहा कि आवश्यकता से अधिक यूरिया डालने के बजाय मृदा स्वास्थ्य और फसल की पोषक जरूरतों के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग प्रोत्साहित किया जाए। यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रदेश में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए उनकी मिट्टी की सेहत की जानकारी दी जा रही है — जांच के अनुसार खाद डालना ही समझदारी है।

खाद संकट की चर्चा क्यों थी: पृष्ठभूमि

पिछले कुछ हफ्तों से प्रदेश में खाद को लेकर चर्चा तेज थी। अक्टूबर की शुरुआत में सामने आया था कि इस महीने सिर्फ 16.5 प्रतिशत आपूर्ति ही हो पाई थी, जिसके बाद बूंदी में किसानों ने मेगा हाईवे जाम तक कर दिया था — पूरी खबर यहां पढ़ें। इससे पहले रबी सीजन के लिए 7.83 लाख टन खाद के स्टॉक की जानकारी भी आई थी। इसी पृष्ठभूमि में 13 अक्टूबर की यह समीक्षा बैठक अहम हो जाती है — अब मसला सिर्फ “खाद है या नहीं” का नहीं, “खाद सही दाम पर, बिना शर्त, सही किसान तक पहुंचे” का है।

एक नजर में: बैठक के मुख्य बिंदु

बिंदुविवरण
बैठक13 अक्टूबर 2026, जयपुर (वीडियो कॉन्फ्रेंस)
अध्यक्षताकृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल, राजफैड MD सौरभ स्वामी
टैगिंग पर रोकयूरिया-DAP के साथ जबरन अन्य उत्पाद नहीं बेचा जा सकेगा
आवंटनजिलों की वास्तविक खपत और फसल जरूरत के आधार पर
निगरानीआपूर्ति से अंतिम वितरण तक, गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: क्या अब दुकानदार डीएपी के साथ नैनो डीएपी खरीदने के लिए मजबूर कर सकता है?
जवाब: नहीं। खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती के तहत साफ निर्देश हैं कि बिक्री में किसी भी प्रकार की अवांछित टैगिंग नहीं होनी चाहिए। किसान बिना किसी अतिरिक्त शर्त के अपनी जरूरत का उर्वरक खरीद सकते हैं।

सवाल: दुकानदार ज्यादा दाम मांगे तो किसान कहां शिकायत करें?
जवाब: सभी जिलों में कृषि विभाग के कंट्रोल रूम बने हैं, जहां खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती के तहत शिकायतों पर नजर रखी जा रही है। नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय से भी शिकायत की जा सकती है।

सवाल: क्या मेरे जिले में खाद की कमी होगी?
जवाब: जिलेवार आवंटन वास्तविक खपत के आधार पर होगा, ताकि किसी जिले में अनावश्यक कमी न हो। निकटतम वितरण केंद्रों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

निष्कर्ष

13 अक्टूबर की बैठक किसानों के लिए उम्मीद लेकर आई है। खाद कालाबाजारी टैगिंग सख्ती, जिलेवार आवंटन और कड़ी निगरानी — ये फैसले अगर जमीनी स्तर पर लागू हुए, तो किसानों को न लंबी कतारों में लगना पड़ेगा, न जबरन टैगिंग झेलनी पड़ेगी। अब नजर इस पर है कि निर्देश खेत तक कितनी तेजी से पहुंचते हैं।

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