लोकमंथन यात्रा 2026 के तीसरे चरण की शुरुआत आज, 8 अक्टूबर को तीर्थराज पुष्कर से हो रही है। लोक संस्कृति, परंपराओं, शिक्षा, साहित्य और खेलों की भावना को आगे बढ़ाने के लिए निकाली जा रही यह यात्रा अगले 14 दिनों तक चित्तौड़ प्रांत के अलग-अलग जिलों से गुजरेगी और 21 अक्टूबर को झालावाड़ में समाप्त होगी। यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत के अनुसार इस दौरान जिन क्षेत्रों से यात्रा गुजरेगी, वहां स्थानीय लोक संस्कृति, खेलकूद और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
इससे पहले इसी लोकमंथन यात्रा के दो चरण पूरे हो चुके हैं — पहला जोधपुर प्रांत में और दूसरा जयपुर प्रांत में। तीसरा चरण इस बार चित्तौड़ प्रांत के लिए तय किया गया है, और इसका समापन झालावाड़ के गुरांडी में होगा।
लोकमंथन यात्रा 2026: पहले दिन का पूरा कार्यक्रम
आज के दिन की शुरुआत सुबह 8 बजे पुष्कर के पवित्र सरोवर की पूजा-अर्चना से होगी। इसके बाद यात्रियों का समूह ब्रह्मा मंदिर में दर्शन करेगा — पुष्कर वैसे भी विश्वप्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के लिए जाना जाता है, और हाल ही में पुष्कर मेले के कार्यक्रमों का पोस्टर भी जारी किया गया था।
सुबह 10 बजे यात्रा वाहन रैली के रूप में पुष्कर मार्ग स्थित आदर्श विद्या निकेतन, अजमेर पहुंचेगी, जहां इसका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे यात्रा सावित्री कन्या महाविद्यालय पहुंचेगी। यहां विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से स्वागत व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
दोपहर 1 बजे यात्रा जयपुर रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कार्यालय पहुंचेगी। यहीं राजीव गांधी सभागार में अधिवक्ता परिषद और राजस्थान ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट फाउंडेशन (आरएचआरडी) के संयुक्त तत्वावधान में एक संगोष्ठी आयोजित होगी। इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री होंगे, जबकि अध्यक्षता जगदीश सिंह राणा करेंगे। रात का विश्राम सरवाड़ के लल्लाई गांव में होगा।
14 दिनों का सफर: जिला दर जिला कार्यक्रम
तीसरे चरण में यात्रा का रूट चित्तौड़ प्रांत के 14 जिलों से होकर गुजरता है। हर दिन एक नया पड़ाव है: 8 अक्टूबर — पुष्करराज / अजयमेरु महानगर (शुभारंभ); 9 अक्टूबर — जालिया-2, ब्यावर; 10 अक्टूबर — काछबली, राजसमंद; 11 अक्टूबर — मजियावड़ी, उदयपुर; 12 अक्टूबर — सलूंबर टोडा; 13 अक्टूबर — डूंगरपुर सिलोही; 14 अक्टूबर — बांसवाड़ा राखो; 15 अक्टूबर — प्रतापगढ़ महुड़िया; 16 अक्टूबर — लूणखेड़ा, चित्तौड़गढ़; 17 अक्टूबर — भीलवाड़ा पनोतिया; 18 अक्टूबर — खटावदा, बूंदी; 19 अक्टूबर — कोटा कल्याणपुरा; 20 अक्टूबर — बारां रूपपुरा; 21 अक्टूबर — झालावाड़ गुरांडी (समापन)।
आयोजकों के अनुसार यात्रा जिन इलाकों से गुजरेगी, वहां के स्थानीय कलाकारों और समूहों को भी कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की अपनी लोक कला और परंपरा सामने आए।
यात्रा का असल मकसद: “हम भारत के लोग”
इस यात्रा का केवल भ्रमण नहीं, बल्कि एक सोच के साथ आगे बढ़ना है। डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य लोक संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देना है। साथ ही यात्रा के दौरान संविधान में लिखे “हम भारत के लोग” शब्दों के अर्थ और उसकी व्यापकता को भी लोगों के बीच विस्तार से समझाया जाएगा।
यह वाक्य भारतीय संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा है, और यात्रा के आयोजक मानते हैं कि लोक संस्कृति के मंच पर इसे आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। इसीलिए हर पड़ाव पर सिर्फ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज से जुड़े संवाद भी होंगे।
पुष्कर अपने धार्मिक महत्व के अलावा सांस्कृतिक आयोजनों का बड़ा केंद्र भी है — कुछ दिन पहले ही पुष्कर में बागेश्वर धाम मंदिर-मठ से जुड़ी घोषणा भी सामने आई थी। ऐसे में लोकमंथन यात्रा का तीर्थराज पुष्कर से शुरू होना प्रतीकात्मक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
इससे पहले के दो चरण कहां हुए
लोकमंथन यात्रा कोई नई शुरुआत नहीं है। इसका पहला चरण 2 से 16 सितंबर तक जोधपुर प्रांत में आयोजित हुआ था, जो रामदेवरा से डीडवानिया तक गया था। दूसरा चरण 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जयपुर प्रांत में चला, जो सांगानेर से चूरू तक पहुंचा था। अब तीसरे चरण में चित्तौड़ प्रांत की बारी है।
हर चरण की तरह इस बार भी यात्रा को जिलों में सामाजिक संगठनों की ओर से स्वागत मिल रहा है। आयोजकों का कहना है कि यात्रा संबंधी और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414785558 पर मनोज जी से ली जा सकती है। विस्तृत विवरण के लिए यहां पढ़ें।
रास्ते में क्या-क्या देखने और सुनने को मिलेगा
यह यात्रा एक जगह से दूसरी जगह सिर्फ सफर करने के लिए नहीं है — हर पड़ाव पर कुछ न कुछ हो रहा होगा। आयोजकों के अनुसार यात्रा जिन क्षेत्रों से गुजरेगी, वहां स्थानीय लोक संस्कृति, खेलकूद और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम रखे गए हैं। इसका मतलब है कि ब्यावर हो या डूंगरपुर, हर जिले की अपनी मिट्टी की कला मंच पर आएगी।
चित्तौड़ प्रांत अपने आप में संस्कृति का खजाना है — उदयपुर और राजसमंद के मेवाड़ी गीत, डूंगरपुर-बांसवाड़ा के आदिवासी नृत्य और ढोल-मांदल की थाप, कोटा-बारां की हाड़ौती परंपरा। यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले स्कूलों और कॉलेजों में भी कार्यक्रम रखे गए हैं, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके। अजमेर में शिक्षा बोर्ड के राजीव गांधी सभागार में होने वाली संगोष्ठी इसी कड़ी का हिस्सा है, जहां शिक्षा और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
जो लोग इन 14 दिनों में किसी पड़ाव के नजदीक रहते हैं, उनके लिए यह अपने क्षेत्र की कला और परंपरा को करीब से देखने का मौका है। कार्यक्रमों का स्वरूप स्थानीय है — यानी हर जगह कुछ नया, कुछ अलग देखने को मिलेगा। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी खूबी मानी जा रही है कि यह किसी एक मंच तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंच रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: लोकमंथन यात्रा 2026 का तीसरा चरण कब शुरू हो रहा है?
उत्तर: तीसरे चरण की शुरुआत 8 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे पुष्कर के पवित्र सरोवर की पूजा-अर्चना और ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के साथ हो रही है।
प्रश्न: यात्रा कितने दिन चलेगी और कहां समाप्त होगी?
उत्तर: यात्रा कुल 14 दिन चलेगी और 21 अक्टूबर को झालावाड़ के गुरांडी में समाप्त होगी। इस दौरान यह चित्तौड़ प्रांत के 14 जिलों से गुजरेगी।
प्रश्न: यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: लोक संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, साहित्य और खेलों की भावना को बढ़ावा देना, साथ ही संविधान में उल्लिखित “हम भारत के लोग” की अवधारणा को आम लोगों तक पहुंचाना।
प्रश्न: यात्रा में शामिल होने या जानकारी के लिए किससे संपर्क करें?
उत्तर: यात्रा संबंधी जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 9414785558 पर मनोज जी से संपर्क किया जा सकता है।