झालावाड़ के खानपुर में चार दिन से जारी भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन धरना आखिरकार सोमवार देर रात समाप्त हो गया। प्रशासन और किसान संघ के बीच हुई लंबी वार्ता में सहमति बनी कि सोमवार को ही 95 किसानों के खातों में 80 लाख रुपये जमा करा दिए जाएंगे और शेष किसानों की पूरी बकाया राशि — कुल मिलाकर करीब 8 करोड़ रुपये — एक महीने के भीतर चुका दी जाएगी।
यह धरना समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचे गए गेहूं के बकाया भुगतान को लेकर चल रहा था। चार महीने पहले खानपुर के सरकारी तौल केंद्रों पर 285 किसानों से करीब 65 हजार बोरी गेहूं की खरीद हुई थी, लेकिन तब से किसानों को उनका पैसा नहीं मिल पाया था। किसान नेता और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस समझौते के बाद किसानों ने धरना उठा लिया है।
समझौते में क्या-क्या तय हुआ
वार्ता में खानपुर तहसीलदार हेमराज कपूर, एसडीएम रजत कुमार और डीएसपी गरिमा जिंदल मौजूद थे, जबकि किसान संघ की ओर से कोटा संभाग के संरक्षक सीताराम नागर और तहसील अध्यक्ष शंकर लाल सुमन ने किसानों का पक्ष रखा। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
| बिंदु | फैसला |
|---|---|
| तत्काल भुगतान | सोमवार को 95 किसानों के खातों में 80 लाख रुपये जमा |
| शेष भुगतान | बाकी किसानों की रकम एक माह के भीतर |
| कुल बकाया | 285 किसानों का करीब 8 करोड़ रुपये |
| भुगतान का माध्यम | खानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति द्वारा जमा |
| ठेकेदार का हिसाब | कमीशन की राशि समिति बाद में ठेकेदार से काटेगी |
तहसीलदार हेमराज कपूर के अनुसार, भुगतान की यह व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है ताकि किसानों को और इंतजार न करना पड़े। रकम समिति द्वारा अदा की जाएगी और बाद में ठेकेदार के बकाया कमीशन से इसकी भरपाई कर ली जाएगी।
चार महीने का इंतजार: पूरा घटनाक्रम कैसे जमा हुआ
कहानी चार महीने पुरानी है। सरकारी तौल कांटों पर क्षेत्र के 285 किसानों ने अपना गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचा था। किसानों की उम्मीद थी कि पैसा कुछ हफ्तों में आ जाएगा, लेकिन हफ्ते महीने में बदले और चार महीने बीत गए। इस दौरान किसान अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन बकाया राशि उनके खातों में नहीं पहुंची।
समिति के व्यवस्थापक अखिलेश गौतम का आरोप है कि गेहूं को एफसीआई के गोदाम तक पहुंचाने का टेंडर केशोरायपाटन की फर्म अभिनव एंड कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि ठेकेदार ने गेहूं निर्धारित गोदाम तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही गबन कर लिया। इसी गड़बड़ी का सीधा असर किसानों के भुगतान पर पड़ा। समिति ने ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है, लेकिन रिपोर्ट दर्ज हुए 9 दिन बीतने के बाद भी अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
ठेकेदार पर गबन का आरोप, 9 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं
यह मामला अब सिर्फ बकाया भुगतान का नहीं, बल्कि जांच का भी बन गया है। खानपुर डीएसपी गरिमा जिंदल के अनुसार मामले की जांच जारी है और अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि अनुसंधान चल रहा है।
किसान संघ के नेताओं का सवाल सीधा है — जब मामला दर्ज हो चुका है तो आरोपी ठेकेदार पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्रशासन का कहना है कि जांच अपने क्रम से आगे बढ़ रही है और किसानों के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। बहरहाल, सोमवार की वार्ता में भुगतान की ठोस तारीख मिलने के बाद किसानों ने धरना समाप्त करने का फैसला लिया।
किसानों की जुबानी: चार दिन धरने पर बैठे सियाराम नागर का दर्द
धरने में चारों दिन मौजूद रहे किसान सियाराम नागर ने कहा कि फसल बेचने के बाद भी अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए उन्हें चार महीने तक संघर्ष करना पड़ा। भुगतान में देरी से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। उनकी बात कई किसानों की सामूहिक पीड़ा को दर्शाती है — फसल बेच दी, लेकिन घर के खर्च, कर्ज की किस्त और अगली बुवाई की तैयारी, सब कुछ अटक गया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फसल की आय ही किसानों का बैंक होती है। जब चार महीने तक 8 करोड़ जैसी राशि अटकी रहती है, तो इसका असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता — बाजार, कर्ज और पूरे परिवार की दिनचर्या प्रभावित होती है। इसीलिए इस बार किसान सिर्फ आश्वासन पर नहीं, लिखित समझौते पर ही धरने से उठे।
अब आगे क्या होगा: बाकी किसानों का पैसा और एक माह की डेडलाइन
समझौते के अनुसार सोमवार को 95 किसानों को 80 लाख रुपये मिलेंगे, लेकिन यह कुल बकाए का सिर्फ एक हिस्सा है। बाकी किसानों के हिस्से की रकम एक महीने के भीतर उनके खातों में जमा कराने की बात तय हुई है।
अब निगाहें दो चीजों पर रहेंगी — पहली, क्या एक माह की समयसीमा में वाकई बाकी 190 किसानों का पैसा पहुंचता है; और दूसरी, ठेकेदार के खिलाफ दर्ज मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। किसान संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।
MSP पर गेहूं की खरीद में भुगतान की प्रक्रिया कैसे होती है
सरकारी खरीद में आमतौर पर तौल केंद्रों पर फसल तुलने के बाद किसानों का डेटा ऑनलाइन दर्ज होता है और भुगतान कुछ हफ्तों में खातों में आना चाहिए। बीच में परिवहन, गोदाम और एफसीआई की प्रक्रिया शामिल होती है। खानपुर के मामले में परिवहन ठेकेदार पर गबन का आरोप लगने से पूरी श्रृंखला टूट गई, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। यही वजह है कि इस बार भुगतान समिति के माध्यम से सीधे कराने का फैसला लिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: झालावाड़ के खानपुर में किसानों का धरना क्यों चल रहा था?
जवाब: चार महीने पहले 285 किसानों ने सरकारी तौल केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर करीब 65 हजार बोरी गेहूं बेचा था, लेकिन करीब 8 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अब तक नहीं हुआ था। इसी को लेकर भारतीय किसान संघ और किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे।
सवाल 2: सोमवार की वार्ता में क्या समझौता हुआ?
जवाब: तय हुआ कि सोमवार को ही 95 किसानों के खातों में 80 लाख रुपये जमा कराए जाएंगे और शेष किसानों की बकाया राशि एक माह के भीतर चुका दी जाएगी। भुगतान खानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति द्वारा कराया जाएगा।
सवाल 3: किसानों का पैसा क्यों अटका था?
जवाब: समिति के व्यवस्थापक के अनुसार, गेहूं को एफसीआई गोदाम तक पहुंचाने का ठेका केशोरायपाटन की फर्म अभिनव एंड कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि ठेकेदार ने रास्ते में ही गेहूं का गबन कर लिया, जिससे भुगतान की प्रक्रिया रुक गई। ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज है और जांच जारी है।
सवाल 4: बाकी किसानों को पैसा कब मिलेगा?
जवाब: समझौते के अनुसार एक माह के भीतर शेष किसानों की पूरी बकाया राशि उनके खातों में जमा कराई जाएगी। किसान संघ ने कहा है कि अगर तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।