राजस्थान के लाखों 10वीं छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर ने 5 अक्टूबर 2026 को एक ऐसा कार्यालय आदेश जारी किया है जो बोर्ड परीक्षा की पूरी व्यवस्था बदल देगा। सत्र 2026-27 से 10वीं (माध्यमिक) और प्रवेशिका की परीक्षा एक ही सत्र में दो बार होगी — और दशकों से चली आ रही पूरक परीक्षा की व्यवस्था हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
इसका सीधा मतलब है: अब एक-दो पेपर में कम अंक आने या कोई पेपर छूट जाने पर पूरा साल बर्बाद नहीं होगा। उसी सत्र में मई में दूसरी परीक्षा होगी, और दोनों में से बेहतर अंक ही अंतिम परिणाम में जुड़ेंगे। अंकतालिका में अब “पूरक” या “अनुत्तीर्ण” शब्द नहीं लिखे जाएंगे।
यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मंशा के अनुरूप है — परीक्षा का दबाव कम करना और छात्रों को प्रदर्शन सुधारने का एक और मौका देना।
दो परीक्षाएं, एक ही सत्र — पूरा शेड्यूल एक नजर में
| व्यवस्था | मुख्य परीक्षा | द्वितीय बोर्ड परीक्षा |
|---|---|---|
| कब होगी | फरवरी–मार्च में | मई महीने में |
| किसके लिए | सभी के लिए अनिवार्य | अंक सुधार या छूटे मौके के लिए |
| पाठ्यक्रम | पूरे सत्र का संपूर्ण पाठ्यक्रम | पूरे सत्र का संपूर्ण पाठ्यक्रम |
| आंतरिक मूल्यांकन व सत्रांक | मुख्य परीक्षा के दौरान, एक बार | दोबारा नहीं होंगे |
सभी नियमित और स्वयंपाठी छात्रों को पहली परीक्षा में बैठना अनिवार्य होगा; दोनों में नामांक एक जैसा और परीक्षा का तरीका समान रहेगा।
EI और ER — ये दो नए शब्द हर छात्र को समझने चाहिए
आदेश की सबसे नई बात दो नई श्रेणियां हैं — EI और ER। इन्हें समझना जरूरी है क्योंकि अब अंकतालिका और आगे की पढ़ाई इन्हीं पर टिकी होगी।
EI यानी Essential Improvement: अधिकतम दो विषयों में 33 प्रतिशत से कम अंक या अनुपस्थिति पर उन विषयों के आगे EI लिखा जाएगा और मई की परीक्षा अनिवार्य होगी। ऐसे छात्रों को कक्षा 11 में अस्थायी प्रवेश भी मिलेगा।
ER यानी Essential Repeat: तीन या ज्यादा विषयों में 33 प्रतिशत से कम अंक या अनुपस्थिति पर मई की परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। परिणाम ER रहेगा और अगले सत्र की मुख्य परीक्षा में सभी विषय दोबारा देने होंगे। मई की परीक्षा के बाद भी अगर किसी एक विषय में न्यूनतम अंक से कम रह गए, तो परिणाम ER ही रहेगा।
सबसे बड़ी राहत — अंतिम परिणाम में प्रथम, द्वितीय या तृतीय श्रेणी, उत्तीर्ण अथवा Essential Repeat दर्ज होगा। कागज पर अब किसी छात्र को “फेल” का ठप्पा नहीं लगेगा।
पास होने वालों को भी मिलेगा नंबर बढ़ाने का मौका
मुख्य परीक्षा में पास छात्र भी अधिकतम तीन विषयों में मई की परीक्षा देकर अंक सुधार सकता है — यह पूरी तरह वैकल्पिक है।
तीन शर्तें याद रखिए: विषय बदलने की अनुमति नहीं होगी; EI वाले विषय भी इन तीन की गिनती में आएंगे (यानी दो EI हैं तो सुधार के लिए सिर्फ एक और विषय चुन पाएंगे); और दोनों परीक्षाओं में से विषयवार बेहतर अंक ही गिने जाएंगे — मई में कम अंक आने से मुख्य परीक्षा के अच्छे अंक डूबेंगे नहीं।
उदाहरण के लिए (काल्पनिक अंक): गणित में 28 और मई में 41 आए तो अंतिम में 41 जुड़ेंगे; अंग्रेजी में 70 और 65 आए तो 70 ही गिने जाएंगे। यानी दूसरी परीक्षा में बैठने का कोई नुकसान नहीं।
11वीं में दाखिला नहीं अटकेगा — Raj-e-Vault से मिलेगा सहारा
मुख्य परीक्षा का परफॉर्मेंस Raj-e-Vault में उपलब्ध होगा, जिसके आधार पर कक्षा 11 में अस्थायी प्रवेश मिलेगा — अधिकतम दो विषयों में EI वालों को भी। मई के बाद अंतिम परिणाम और प्रमाणपत्र जारी होगा।
राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेने वाले छात्रों को भी छूट है: जिन विषयों की परीक्षा तिथियां खेल आयोजन से टकराती हैं, उनमें वे द्वितीय परीक्षा में बैठ सकेंगे — बस प्रमाण परीक्षा से पहले शाला प्रधान के जरिए बोर्ड को भेजना होगा। विशेष आवश्यकता वाले (CWSN) छात्रों को दोनों परीक्षाओं में वही सुविधाएं मिलेंगी। उत्तरपुस्तिका की संवीक्षा भी दोनों परीक्षाओं में अलग-अलग कराई जा सकेगी।
एक और अहम बदलाव: वर्ष 2028 की परीक्षा से श्रेणी-06 का नियम भी खत्म हो रहा है। पहले पास छात्र अगले साल आंशिक विषयों में अंक सुधार के लिए बैठ सकते थे — अब सुधार का मौका सिर्फ उसी सत्र की मई वाली परीक्षा में मिलेगा।
छात्रों और अभिभावकों के लिए काम की 7 बातें
- मुख्य परीक्षा को हल्के में न लें। मई की पात्रता तभी बनेगी जब मुख्य परीक्षा में बैठे हों। वैध मेडिकल सर्टिफिकेट या जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति पर अनुपस्थित छात्र को मई में मौका मिल सकता है।
- तीन या ज्यादा विषयों में गड़बड़ से बचें। यह सीधे ER की तरफ ले जाता है — पूरा साल दोबारा। दो विषयों तक की कमी EI में संभल जाती है।
- परफॉर्मेंस शीट में EI जरूर देखें। जिन विषयों के आगे EI है, उनमें मई की परीक्षा अनिवार्य है।
- सुधार के विषय सोच-समझकर चुनें। एक बार चुने गए विषय बाद में बदले नहीं जा सकेंगे।
- खिलाड़ी छात्र समय पर कागजात दें। खेल तिथियों का प्रमाण परीक्षा से पहले शाला प्रधान के जरिए बोर्ड को पहुंचाएं।
- प्रायोगिक परीक्षा का ध्यान रखें। प्रायोगिक में पास छात्रों को दोबारा प्रायोगिक नहीं देना होगा; फेल छात्रों को मई में देना अनिवार्य होगा।
- आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें। आदेश में संशोधन की गुंजाइश है, इसलिए rajeduboard.rajasthan.gov.in और स्कूल की सूचनाओं पर नजर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या अब 10वीं में पूरक परीक्षा होगी?
उत्तर: नहीं। सत्र 2026-27 से माध्यमिक और प्रवेशिका परीक्षाओं में पूरक व्यवस्था पूरी तरह समाप्त। अंकतालिका में “पूरक” या “अनुत्तीर्ण” नहीं लिखा जाएगा।
प्रश्न: मुख्य परीक्षा में पास होने पर क्या मई की परीक्षा जरूरी है?
उत्तर: नहीं, यह वैकल्पिक है। अधिकतम तीन विषयों में अंक सुधार कर सकते हैं, पर न बैठने पर भी प्रमाणपत्र मुख्य परीक्षा के अंकों पर मिलेगा।
प्रश्न: मई में कम अंक आए तो क्या मुख्य परीक्षा के अंक खराब होंगे?
उत्तर: नहीं। दोनों में से विषयवार बेहतर अंक ही गिने जाएंगे — पहले के अच्छे अंक पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।
प्रश्न: क्या यह व्यवस्था 12वीं पर भी लागू होगी?
उत्तर: नहीं। आदेश सिर्फ कक्षा 10 (माध्यमिक) और प्रवेशिका परीक्षा के लिए है।
नोट: यह लेख बोर्ड के कार्यालय आदेश (क्रमांक माशिबो/शैक्षिक/2026-27/2799-2813, दिनांक 05-10-2026) पर आधारित है। निर्णय से पहले मूल अधिसूचना और शाला प्रधान से पुष्टि अवश्य करें।