गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में देरी अब बर्दाश्त नहीं: मुख्य सचिव ने 104 जननी एक्सप्रेस की समीक्षा में दिए सख्त निर्देश

प्रसव के समय हर मिनट कीमती होता है — हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में तो एक-एक मिनट जीवन-मृत्यु का फर्क तय कर सकता है। राजस्थान में अब गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली देरी को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को शासन सचिवालय में 104 जननी एक्सप्रेस सेवा के संचालन और प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं — खासकर हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं — को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था और मजबूत की जाए। बैठक में सेवा के भविष्य — ओपन टेंडर या सार्वजनिक उपक्रम के विकल्प — पर भी चर्चा हुई।

देरी ही सबसे बड़ा दुश्मन — क्यों अहम है ये समीक्षा

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव संबंधी जटिलताओं में सबसे ज्यादा नुकसान देरी से होता है। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में — जैसे गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप या पहले हुई कोई जटिलता — महिला को सही समय पर अस्पताल पहुंचना ही सबसे बड़ा इलाज होता है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर परिवारों के पास आपात स्थिति में तुरंत वाहन नहीं होता, और ठीक यहीं जननी एक्सप्रेस जैसी सरकारी सेवा सबसे ज्यादा काम आती है।

मुख्य सचिव ने बैठक में इसी बुनियादी बात पर जोर दिया — अब सिर्फ एंबुलेंस उपलब्ध होना ही काफी नहीं माना जाएगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी होगी। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जननी एक्सप्रेस के बीच बेहतर तालमेल जरूरी बताया गया। साफ है, सरकार इस सेवा को एक जवाबदेह सिस्टम बनाना चाहती है।

मुख्य सचिव के बड़े निर्देश — अब हर कॉल और हर एंबुलेंस पर रहेगी नजर

समीक्षा बैठक में सबसे बड़ा फोकस निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर रहा। अब जननी एक्सप्रेस कॉल सेंटर के रोजाना के कामकाज की विस्तृत समीक्षा होगी — सहायता के लिए कॉल आने से लेकर एंबुलेंस के रवाना होने तक की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ा जाएगा, ताकि प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक के स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो सके।

जमीनी अमल को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। प्रत्येक एंबुलेंस के इस्तेमाल की नियमित समीक्षा होगी, और फील्ड रिपोर्ट के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत है। स्थानीय स्तर पर संचालन व्यवस्था मजबूत की जाएगी, ताकि उपलब्ध एंबुलेंस का बेहतर इस्तेमाल हो और जरूरतमंद महिलाओं को समय पर परिवहन सुविधा मिल सके।

104 जननी एक्सप्रेस — ये सेवा है क्या और कितनी बड़ी है

104 जननी एक्सप्रेस राजस्थान में गर्भवती महिलाओं के लिए चलाई जा रही निःशुल्क एंबुलेंस परिवहन सेवा है। 104 हेल्पलाइन पर कॉल करते ही गर्भवती महिला को घर से अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भेजी जाती है, ताकि प्रसव सुरक्षित माहौल में हो सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक जोगाराम के अनुसार फिलहाल इस सेवा के तहत प्रदेश में 600 एंबुलेंस उपलब्ध हैं।

सेवा के पैमाने का अंदाजा इसी से लगाएं — जनवरी 2021 से 10 दिसंबर 2025 तक कुल 18,86,048 लाभार्थियों ने इसका लाभ उठाया, यानी करीब 19 लाख गर्भवती महिलाएं इस सेवा के जरिए अस्पताल पहुंचीं। फिलहाल इसका संचालन राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के माध्यम से हो रहा है, और जुलाई 2026 से सभी 600 एंबुलेंस के पूरी तरह संचालित होने की उम्मीद जताई गई थी।

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी — किन महिलाओं को रहना होगा सबसे ज्यादा सतर्क

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का मतलब है ऐसा गर्भकाल जिसमें मां या शिशु के लिए जटिलता का खतरा सामान्य से ज्यादा हो। चिकित्सकों के अनुसार कुछ स्थितियों में विशेष सावधानी जरूरी है: 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप या प्री-एक्लेम्पसिया, मधुमेह, पहले सिजेरियन डिलीवरी, जुड़वां गर्भ, पहले प्रसव में अत्यधिक रक्तस्राव का इतिहास और हृदय संबंधी बीमारी।

ऐसे मामलों में नियमित प्रसव-पूर्व जांच, समय पर अस्पताल पहुंचना और आपात स्थिति के लिए पहले से योजना बनाकर रखना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि सरकार हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान को परिवहन व्यवस्था से जोड़ना चाहती है — ताकि खतरे वाली महिला की जानकारी पहले से सिस्टम में हो और जरूरत पड़ते ही एंबुलेंस बिना देरी के पहुंच जाए।

आगे क्या — सेवा का संचालन अब कौन संभालेगा

बैठक का एक अहम एजेंडा जननी एक्सप्रेस के आगामी संचालन को लेकर था — इस पर ओपन टेंडर या किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के जरिए प्रबंधन के विकल्पों पर विचार किया गया। यानी सेवा के संचालन का मॉडल बदल सकता है; मकसद इसे और पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाना है।

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़, वित्त विभाग के प्रतिनिधि, जन स्वास्थ्य निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त मिशन निदेशक, वित्त निदेशक, परियोजना निदेशक, स्टोर अधिकारी, राज्य नोडल अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। इतने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से साफ है कि सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है।

आंकड़े एक नजर में

विषयविवरण
सेवा का नाम104 जननी एक्सप्रेस
उपलब्ध एंबुलेंस600
लाभार्थी (जनवरी 2021 – 10 दिसंबर 2025)18,86,048
हेल्पलाइन नंबर104
वर्तमान संचालनराजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी
समीक्षामुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, शासन सचिवालय, जयपुर
नई निगरानी व्यवस्थाकॉल रिकॉर्ड मासिक रिपोर्ट से जुड़ेगा; प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक स्तर पर समीक्षा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

104 जननी एक्सप्रेस सेवा क्या है?

यह राजस्थान सरकार की एंबुलेंस परिवहन सेवा है, जो गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल तक पहुंचाती है। 104 हेल्पलाइन पर कॉल करते ही नजदीकी एंबुलेंस भेजी जाती है।

क्या इस सेवा के लिए कोई शुल्क देना होता है?

यह सेवा गर्भवती महिलाओं के लिए सरकारी योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, ताकि आर्थिक तंगी प्रसव के समय अस्पताल पहुंचने में बाधा न बने।

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी किसे कहते हैं?

ऐसा गर्भकाल जिसमें मां या शिशु के लिए जटिलता का खतरा सामान्य से अधिक हो — जैसे गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कम या अधिक उम्र में गर्भधारण, पहले सिजेरियन या जुड़वां गर्भ। ऐसी महिलाओं को विशेष निगरानी और समय पर अस्पताल पहुंचने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में क्या तय हुआ?

कॉल सेंटर की रोजाना समीक्षा, हर एंबुलेंस के इस्तेमाल की नियमित निगरानी, कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ना, फील्ड रिपोर्ट के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान, और सेवा के भविष्य के संचालन मॉडल पर विचार — ये बैठक के प्रमुख फैसले रहे।

अगर आपके परिवार या पड़ोस में कोई गर्भवती महिला है, तो प्रसव-पूर्व जांच को हल्के में न लें और आपात स्थिति के लिए 104 नंबर पहले से नोट करके रखें। समय पर उठाया गया एक कदम दो जिंदगियां बचा सकता है।

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