कोटा में ‘ऑपरेशन हॉक’ शुरू: चाकूबाजी पर पुलिस की सीधी नजर, 9 विशेष टीमें मैदान में

कोटा की गलियों, चौराहों, पार्कों और बाजारों में अब पुलिस की खास टीमें नियमित रूप से नजर आएंगी। कोटा पुलिस ने चाकूबाजी और अवैध हथियारों के खिलाफ पूरे संभाग में शुक्रवार से एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है — ‘हंट अगेंस्ट वेपन एंड नाइफ हॉक’, जिसे संक्षेप में ‘ऑपरेशन हॉक’ कहा जा रहा है। अलग-अलग थानों से 54 पुलिसकर्मियों को चुनकर 9 विशेष टीमें तैयार की गई हैं। हर टीम हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर के साथ बिना पूर्व सूचना के संवेदनशील स्थानों पर चेकिंग करेगी।

पुलिस का कहना है कि इस अभियान का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि चाकूबाजी की मानसिकता पर अंकुश लगाना है। शहर में सार्वजनिक जगहों पर चाकू या धारदार हथियार लेकर घूमने वालों पर अब सीधी कार्रवाई होगी। पुलिस अधिकारियों ने अभियान का पोस्टर भी जारी किया है और रेंज स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, ताकि कार्रवाई पूरे संभाग में एक जैसी गति से चले।

कोटा के लिए क्यों जरूरी है यह अभियान

कोटा सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि राजस्थान का सबसे बड़ा शैक्षणिक केंद्र है। देशभर से हजारों छात्र यहां कोचिंग के लिए आते हैं और हॉस्टलों व पीजी में रहते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। पार्कों, चाय की थड़ियों, बाजारों और शिक्षण संस्थानों के आसपास होने वाली छोटी-मोटी झड़पें कई बार चाकूबाजी जैसी गंभीर घटनाओं में बदल जाती हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चाकूबाजी की घटनाओं में सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ये अक्सर तात्कालिक गुस्से या वर्चस्व की लड़ाई में हो जाती हैं। अगर सार्वजनिक जगहों पर हथियार लेकर घूमने की प्रवृत्ति पर ही अंकुश लग जाए, तो आधी समस्या वहीं सुलझ जाती है। ऑपरेशन हॉक की पूरी रणनीति इसी सोच पर टिकी है — अपराध होने से पहले ही उसकी जड़ पर चोट करना। इसे ‘निवारक पुलिसिंग’ का अच्छा उदाहरण माना जा सकता है।

3D रणनीति: डिटेक्ट, डिटर, डिसआर्म

ऑपरेशन हॉक तीन ‘डी’ के सिद्धांत पर तैयार किया गया है — डिटेक्ट (पहचान), डिटर (रोकथाम) और डिसआर्म (हथियार छीनना)। पहले चरण में पुलिस खुफिया सूचनाओं, पुराने अपराध रिकॉर्ड और आमजन की जानकारी के आधार पर हथियारबाजों की पहचान करेगी। मेटल डिटेक्टर से सार्वजनिक जगहों पर छिपे हथियारों का पता लगाया जाएगा।

दूसरे चरण में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाएगा — जब अपराधियों को अहसास हो कि किसी भी समय, किसी भी जगह जांच हो सकती है, तो वे हथियार लेकर निकलने से कतराएंगे। इसीलिए अभियान के स्थान और समय को पूरी तरह गुप्त रखा गया है। तीसरे चरण में जिसके पास अवैध हथियार मिलेगा, उसे तुरंत जब्त कर आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। टीमें सार्वजनिक स्थल, पार्क, चाय की थड़ी या स्कूलों के आसपास कहीं भी औचक निरीक्षण कर सकती हैं।

9 टीमें, 54 पुलिसकर्मी: नोडल व्यवस्था में चलेगा अभियान

अभियान की कमान कोटा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक हरेंद्र महावर के हाथ में है। उन्होंने संभाग के पुलिस अधिकारियों को अपराध के प्रकार के अनुसार नोडल अधिकारी बनाया है, ताकि हर तरह के अपराध पर केंद्रित कार्रवाई हो सके। चाकूबाजी और फायरिंग से जुड़े मामलों में आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए कोटा शहर की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

एसपी गौतम के अनुसार कुल 9 टीमें बनाई गई हैं और हर टीम में 6 सदस्य हैं। ये 54 पुलिसकर्मी अलग-अलग थानों से चुने गए हैं और सभी को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। हर टीम दिन में एक या दो थानों के क्षेत्र में जाकर कार्रवाई करेगी। टीमें उन संवेदनशील जगहों पर जाएंगी जहां चाकूबाजी की घटनाएं आम हैं, और वहां पूरी तरह निवारक कार्रवाई करेंगी।

आंकड़े: कमी आई है, पर चुनौती बनी हुई है

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक कोटा में चाकूबाजी के मामले धीरे-धीरे कम हो रहे हैं, लेकिन समस्या अब भी गंभीर है। एसपी गौतम ने बताया कि 2025 में अगस्त तक चाकूबाजी के 64 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस साल इसी अवधि तक यह संख्या 15 फीसदी कम होकर 56 रह गई है — यानी करीब 8 मामलों की कमी।

एसपी ने चाकूबाजी को कोटा का ‘लिगेसी क्राइम’ यानी विरासत में मिला अपराध कहा है — एक ऐसी समस्या जो लंबे समय से शहर के साथ चली आ रही है। पुलिस का मानना है कि लगातार कार्रवाई और रोकथाम के उपायों से ही इस प्रवृत्ति को जड़ से खत्म किया जा सकता है। ऑपरेशन हॉक इसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है, जिसमें न सिर्फ हथियारबाजों पर बल्कि हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला पर भी चोट करने की योजना है।

चाकू बेचने वालों और ऑनलाइन बिक्री पर भी नजर

अभियान का दायरा सिर्फ चाकू लेकर घूमने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। चाकू और धारदार हथियार बेचने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जिसके पास हथियार मिलेगा, उसकी पृष्ठभूमि खंगाली जाएगी — अगर वह पहले चाकूबाजी या हथियार से जुड़े अपराध में शामिल रहा है, तो उसका रिकॉर्ड देखकर और कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

यही नहीं, ऑनलाइन माध्यम से चाकू बेचने वालों पर भी साइबर अपराध के तहत कार्रवाई होगी। यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि हथियारों की आसान उपलब्धता ही चाकूबाजी को बढ़ावा देती है। अगर बिक्री के स्रोत पर ही रोक लग जाए, तो सड़कों पर हथियार लेकर घूमने वालों की संख्या अपने आप घटेगी। पुलिस का यह दोहरा हमला — एक तरफ इस्तेमाल करने वालों पर, दूसरी तरफ बेचने वालों पर — अभियान को और प्रभावी बनाएगा।

बिना लाइसेंस के हथियार रखना आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर अपराध है, जिसमें कठोर सजा का प्रावधान है। अक्सर युवा ‘शोख’ के चक्कर में चाकू रख लेते हैं, बिना यह समझे कि यह गंभीर कानूनी अपराध है।

आमजन की भूमिका: सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय

ऑपरेशन हॉक की खास बात यह है कि इसमें आम लोगों को भी जोड़ा जा रहा है। कोई भी व्यक्ति पुलिस को सूचना दे सकता है कि कहां अवैध चाकू या हथियार लेकर घूमने वाले लोग मौजूद रहते हैं। ऐसी सूचनाओं के आधार पर भी टीमें कार्रवाई करेंगी।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस अभियान में कोई भी संवेदनशील जगह अछूती नहीं रहेगी — सार्वजनिक स्थान, पार्क, चाय की थड़ी और स्कूलों के आसपास हर जगह पुलिस की नजर रहेगी। पुलिस की अपील है कि अगर किसी को अपने आसपास हथियारबाजी की गतिविधि दिखे, तो नजदीकी थाने या पुलिस कंट्रोल रूम को जरूर बताएं। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। सुरक्षित समाज की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस की नहीं, हम सबकी है।

एक नजर में: ऑपरेशन हॉक के प्रमुख बिंदु

बिंदु विवरण
अभियान का नाम हंट अगेंस्ट वेपन एंड नाइफ हॉक (ऑपरेशन हॉक)
शुरू होने की तिथि 2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)
क्षेत्र पूरा कोटा संभाग
समग्र नेतृत्व रेंज आईजी हरेंद्र महावर
नोडल अधिकारी (अवैध हथियार) एसपी तेजस्विनी गौतम
विशेष टीमें 9 टीमें, 54 पुलिसकर्मी (हर टीम में 6)
जांच उपकरण हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर
रणनीति 3D — डिटेक्ट, डिटर, डिसआर्म
2025 (अगस्त तक) चाकूबाजी के मामले 64
2026 (अब तक) चाकूबाजी के मामले 56 (15% कमी)
अतिरिक्त दायरा चाकू बेचने वाले, ऑनलाइन बिक्री पर साइबर एक्शन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: ऑपरेशन हॉक क्या है?

जवाब: यह कोटा पुलिस का चाकूबाजी और अवैध हथियारों के खिलाफ विशेष अभियान है, जिसका पूरा नाम ‘हंट अगेंस्ट वेपन एंड नाइफ हॉक’ है। इसे 2 अक्टूबर 2026 से पूरे कोटा संभाग में शुरू किया गया है। अभियान 3D रणनीति — डिटेक्ट, डिटर और डिसआर्म — पर आधारित है।

सवाल: अभियान में कितनी टीमें काम करेंगी?

जवाब: कुल 9 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें 54 पुलिसकर्मी शामिल हैं। हर टीम में 6 सदस्य हैं और सभी को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। टीमें मेटल डिटेक्टर के साथ संवेदनशील स्थानों पर औचक निरीक्षण करेंगी।

सवाल: पुलिस कहां-कहां कार्रवाई करेगी?

जवाब: सार्वजनिक स्थान, पार्क, चाय की थड़ी, स्कूलों के आसपास और वे संवेदनशील इलाके जहां चाकूबाजी की घटनाएं आम हैं। स्थान और समय पहले से तय नहीं होगा — पूरी तरह औचक निरीक्षण किया जाएगा।

सवाल: आम नागरिक कैसे मदद कर सकते हैं?

जवाब: अगर आपको कहीं अवैध हथियार या चाकू लेकर घूमने वाले लोग दिखें, तो नजदीकी थाने या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

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