जयपुर को गुलाबी नगरी कहते हैं, स्मार्ट सिटी की सूची में भी इसका नाम है, और नगर निगम ने हाल ही में शहर की सूरत बदलने के लिए 100 दिवसीय कार्ययोजना का ऐलान भी किया है। लेकिन कॉलोनियों में रहने वालों की हकीकत कागजों के दावों से कोसों दूर है। कहीं पंद्रह साल में एक बार भी सड़क नहीं बनी, तो कहीं सीवर का गंदा पानी गलियों में बह रहा है। राजस्थान पत्रिका की नई पहल जयपुर पब्लिक का पन्ना में आज सामने आई नागरिकों की शिकायतों ने इस खाई को फिर उजागर कर दिया है।
जयपुर पब्लिक का पन्ना: जहां शिकायत असर दिखा गई
अच्छी खबर से शुरुआत करते हैं। पत्रिका के 12 अक्टूबर के अंक में ‘पब्लिक का पन्ना’ पर प्रकाशित जनसमस्याओं का असर दिखना शुरू हो गया है। वैशाली के वैभव नगर में सड़क किनारे पड़ी गंदगी को नगर निगम ने उठवाना शुरू कर दिया है। मान्यावास के तिरुपति विहार में कचरा लेने वाला हूपर अब समय पर पहुंचने लगा है। और हाईटेंशन लाइन के नीचे गोल्यावास क्षेत्र में चल रहे अवैध बजरी-ईंटों के कारोबार पर जेडीए कार्रवाई करेगा — प्रवर्तन शाखा ने रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। शिकायत जब सार्वजनिक होती है, तो सिस्टम को हिलना पड़ता है — बाकी शिकायतों पर भी विभागों ने रिपोर्ट बनानी शुरू की है।
आबादी के बीच आरएमसी प्लांट: धूल-धुएं से सांसें फूल रहीं
धावास में हालात गंभीर हैं। एसएनएम चौराहे से लालरपुरा होते हुए वर्धमान किंग्स कोर्ट की ओर जाने वाली जेडीए की सेक्टर रोड के आस-पास दो रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट घनी आबादी के बीच चल रहे हैं। दिन-रात धूल-धुएं और शोर ने आस-पास रहने वालों का जीना मुहाल कर दिया है। नीतू सिंह बताती हैं कि रोजाना उड़ने वाली धूल से कई बच्चों और बुजुर्गों को सांस संबंधी गंभीर बीमारियां हो गई हैं, जबकि कुलदीप सक्सेना के मुताबिक गर्भवती महिलाओं और वृद्धजनों को सबसे ज्यादा दिक्कत है। राजस्थान संपर्क पोर्टल पर कई बार शिकायत के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। नागरिकों की मांग है कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जेडीए और नगर निगम मिलकर जांच करें और आबादी क्षेत्र के प्रदूषक प्लांट बंद कराएं।
सीवर उफान पर, सड़कें गड्ढों से भरीं
झोटवाड़ा विधानसभा के सुशांत सिटी 2 (माचवा) में सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह लीकेज से लाइनें उफान पर हैं और सड़कों पर गंदा-बदबूदार पानी फैल गया है। रहवासियों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है, और गंदे पानी के जमावड़े से संक्रामक बीमारियों का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सीकर रोड के त्रिवेणी नगर में तो जेडीए-अप्रूव्ड कॉलोनी में भी न पक्की सड़क है, न सीवरेज — जयपुर पब्लिक का पन्ना में लोगों ने बताया कि जेडीए और पंचायत प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं।
जयपुर पब्लिक का पन्ना: पंद्रह साल से सड़क का इंतजार, तैंतीस साल से बसावट बिना सुविधा
रामनगरिया की जेडीए कॉलोनी और बैंक ऑफिसर्स कैंपस में पंद्रह साल में एक बार भी सड़क नहीं बनी। बारिश में जलभराव से घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कालवाड़ रोड के किशोरपुरा में भी पंद्रह साल पहले जेडीए से अप्रूव्ड होने के बाद भी न सड़क है, न रोड लाइट — रात में अंधेरे के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
सांगानेर के कल्याणपुरी (वार्ड 50) में तो वर्ष 1993 से बसावट शुरू हुई, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी बनी है। जेडीए से पट्टा लेने के लिए लोग कई चक्कर काट चुके हैं — हर बार आश्वासन और अगली तारीख मिलती है। तय रकम जमा कराने के बाद भी सीवर लाइन नहीं डली, जिससे कॉलोनी टापू बनने की कगार पर है। दस साल पहले लगी स्ट्रीट लाइटें खराब हो चुकी हैं और ट्रांसफार्मर खुले पड़े हैं।
अंधेरे में डूबे रास्ते और खुले ट्रांसफार्मर
प्रताप नगर में राणा सांगा मार्ग (वार्ड 62) से सीतापुरा जाने वाला व्यस्ततम मार्ग करीब एक माह से अंधेरे में डूबा है — स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। रात होते ही अंधेरा छा जाता है और वाहन चालकों व राहगीरों के लिए दुर्घटना की आशंका रहती है। मानसरोवर के कृष्णा विहार विस्तार में सीवर चैंबर के पास सड़क बार-बार धंस जाती है — छह महीने में कई बार गड्ढा हो चुका है।
धर्मपार्क कॉलोनी में खुले ट्रांसफार्मर और मुख्य द्वार पर कचरा डिपो, मॉडल टाउन के गणेश विहार (वार्ड 67) में सांडों का जमावड़ा, और झोटवाड़ा पुलिया के नीचे तीन वर्षों से अवैध लाइनों से बहता हजारों लीटर पेयजल — हर जगह हादसे का खतरा एक जैसा है।
जयपुर पब्लिक का पन्ना: एक नजर में मुद्दे और स्थिति
| मुद्दा | स्थान | मौजूदा स्थिति |
|---|---|---|
| आरएमसी प्लांट से धूल-धुएं और शोर | धावास, वार्ड 35 | शिकायत दर्ज, कार्रवाई बाकी |
| सीवर लीकेज, सड़कों पर गंदा पानी | सुशांत सिटी 2, माचवा | कोई समाधान नहीं, बीमारी का खतरा |
| 15 साल में एक बार भी सड़क नहीं बनी | रामनगरिया | जलभराव, घर से निकलना मुश्किल |
| एक माह से स्ट्रीट लाइटें बंद | राणा सांगा मार्ग, वार्ड 62 | अंधेरा, दुर्घटना की आशंका |
| एसटीपी निर्माण से रास्ते बंद होने की आशंका | कौशल्या विहार, सांगानेर | शिकायतें दीं, समाधान नहीं |
शिकायत कहां करें? ये रास्ते खुले हैं
सबसे पहला रास्ता राजस्थान संपर्क पोर्टल है — राज्य सरकार का आधिकारिक शिकायत निस्तारण तंत्र, जहां हर शिकायत पर एक शिकायत संख्या मिलती है और समयबद्ध निस्तारण का प्रावधान है। संबंधित विभाग से भी सीधे संपर्क करें: सड़क-सीवरेज के लिए नगर निगम या जेडीए, प्रदूषण के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पेयजल के लिए जलदाय विभाग।
दूसरा रास्ता जयपुर पब्लिक का पन्ना पहल है — वॉट्सऐप नंबर 9057531314 या ईमेल jaipur@in.patrika.com पर अपने मोहल्ले की समस्या भेजें; अगली मोहल्ला मीटिंग आपकी कॉलोनी में भी हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
‘पब्लिक का पन्ना’ क्या है?
राजस्थान पत्रिका की पहल — जयपुर पब्लिक का पन्ना के तहत जनता अपनी कॉलोनी की समस्याएं (सड़क, पानी, सफाई, बिजली, अतिक्रमण) अखबार से साझा करती है; अच्छी पहल और प्रेरक खबरें भी छपती हैं।
अपने मोहल्ले की समस्या कैसे भेजें?
वॉट्सऐप नंबर 9057531314 पर या ईमेल jaipur@in.patrika.com पर विवरण और फोटो भेजें। अखबार में दिया क्यूआर कोड स्कैन करके भी शिकायत दर्ज हो सकती है।
राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत का क्या फायदा है?
यह सरकार का आधिकारिक शिकायत निस्तारण तंत्र है। हर शिकायत पर संख्या मिलती है, जिससे स्थिति ट्रैक होती है और विभागों को समयबद्ध निस्तारण करना होता है।
मोहल्ला मीटिंग क्या होती है?
पत्रिका की टीम कॉलोनियों में जाकर निवासियों से मिलती है और समस्याएं सीधे सुनती है। उठे मुद्दे अखबार में छपते हैं, जिससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनता है।