किशनगढ़/जयपुर। राजस्थान पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी पर हुई बड़ी कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने अजमेर जिले के किशनगढ़ में तैनात ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव को एपीओ (APO — पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया है। यह कार्रवाई एक वकील को थप्पड़ मारने के उस विवाद के बाद हुई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और वकील समुदाय ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। डीएसपी अंजू यादव प्रकरण अब सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पुलिस अधिकारियों के सार्वजनिक आचरण और कानून के प्रति जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएसपी अंजू यादव APO: क्या है पूरा घटनाक्रम
पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार, मंगलवार (13 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश के बाद अंजू यादव को तत्काल प्रभाव से एपीओ किया गया। एपीओ का मतलब है कि अधिकारी को किसी पद पर तैनाती नहीं दी गई है और वह अगले आदेश तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेगा। पुलिस महकमे में इसे गंभीर माने जाने वाली प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जाता है।
इस कार्रवाई के पीछे की कहानी 9 अक्टूबर की रात से शुरू होती है, जब किशनगढ़ में सड़क किनारे खड़ी एक कार को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। यह विवाद देखते ही देखते इतना तूल पकड़ गया कि मामला थप्पड़ कांड तक पहुंच गया, और फिर वकीलों के भारी विरोध ने इसे राज्यस्तरीय चर्चा का विषय बना दिया।
9 अक्टूबर की रात: किशनगढ़ में थप्पड़ कांड कैसे शुरू हुआ
अजमेर जिले के किशनगढ़ शहर में 9 अक्टूबर को सड़क किनारे खड़ी एक कार को लेकर ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव और अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया के बीच विवाद हो गया। शुरुआत में कार की पार्किंग को लेकर हुई बातचीत धीरे-धीरे तीखी बहस में बदल गई। आरोप है कि इसी बहस के दौरान डीएसपी अंजू यादव ने अधिवक्ता को थप्पड़ मार दिया।
घटना के बाद मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। आसपास मौजूद लोगों के बीच खबर फैलते ही वकील समुदाय में भारी नाराजगी देखी गई। कुछ ही घंटों में इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विवाद ने और रफ्तार पकड़ ली। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे।
वकीलों का सड़कों पर उतरना: प्रदर्शन, जाम और फिर माफी
थप्पड़ कांड की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्रित हो गए। वकील पुराना रेलवे स्टेशन रोड स्थित यातायात चौकी पहुंचे और महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ विरोध जताया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने मुख्य चौराहे पर पहुंचकर जाम लगा दिया, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और आवागमन भी बाधित हुआ।
देर रात डीएसपी अंजू यादव की ओर से अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया के साथ एक वीडियो बनाया गया, जिसमें उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताया और माफी मांगी। इस माफी के बाद उम्मीद की जा रही थी कि विवाद शांत हो जाएगा और मामला आगे नहीं बढ़ेगा। तत्काल रूप से तो विवाद थम गया, लेकिन अधिवक्ता समुदाय में कार्रवाई की मांग बनी रही।
सोशल मीडिया कमेंट ने विवाद को फिर हवा दे दी
डीएसपी अंजू यादव प्रकरण यहीं नहीं रुका। थप्पड़ कांड के कुछ समय बाद अंजू यादव के सोशल मीडिया अकाउंट से एक संदेश का जवाब देते हुए किए गए कमेंट ने नए विवाद को जन्म दे दिया। कमेंट में लिखा था — “आदत है उड़ता तीर लेने की, दम रखते हैं उतना।” इस कमेंट को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई और कई लोगों ने एक पुलिस अधिकारी के इस तरह के सार्वजनिक व्यवहार पर सवाल उठाए।
देखते ही देखते यह कमेंट चर्चा का विषय बन गया और अंजू यादव को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। बढ़ते विरोध के बीच अंजू यादव ने वीडियो जारी कर अपने कमेंट के लिए सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि आवेश में आकर जल्दबाजी में उनसे यह कमेंट हो गया था। हालांकि, तब तक मामला काफी तूल पकड़ चुका था और वकीलों के विरोध के साथ-साथ सोशल मीडिया का दबाव भी लगातार बढ़ रहा था।
पुलिस अधिकारियों के आचरण पर बड़ा सवाल: डीएसपी अंजू यादव प्रकरण के सबक
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस अधिकारियों के आचरण, सार्वजनिक व्यवहार और कानून के प्रति जवाबदेही जैसे बुनियादी मुद्दों को एक बार फिर सामने ला दिया है। पुलिस अधिकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम नागरिकों और पेशेवर वर्गों के साथ मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्दीधारी अधिकारी का कोई भी विवादित आचरण पूरे विभाग की छवि पर असर डालता है।
गौरतलब है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की समीक्षा को लेकर सरकार पहले से ही सख्त रुख अपनाए हुए है। हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक ही समीक्षा बैठक में नौ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिनमें एक थानाधिकारी को निलंबित भी किया गया था। डीएसपी अंजू यादव पर हुई APO की कार्रवाई इसी कड़ी में देखी जा रही है — सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अधिकारी चाहे किसी भी पद पर हो, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि APO अपने आप में दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, लेकिन यह विभागीय जांच का रास्ता जरूर खोल देता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस प्रकरण में विभागीय जांच बैठेगी और अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी। वकील समुदाय का कहना है कि सिर्फ APO से उनका गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है, जबकि पुलिस अधिकारी वर्ग इसे सोशल मीडिया के दबाव में हुई जल्दबाजी वाली कार्रवाई बता रहा है। दोनों पक्षों की दलीलें अपनी-अपनी जगह हैं, लेकिन सच यही है कि यह मामला अब राजस्थान में पुलिस सुधारों की बहस का नया चेहरा बन गया है।
घटनाक्रम की टाइमलाइन
| क्रम | तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|---|
| 1 | 9 अक्टूबर 2026 | किशनगढ़ में कार पार्किंग विवाद के दौरान डीएसपी अंजू यादव ने अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारा; वीडियो वायरल |
| 2 | 9 अक्टूबर (रात) | वकीलों ने यातायात चौकी पर प्रदर्शन किया, मुख्य चौराहे पर जाम; डीएसपी ने माफी का वीडियो बनाया |
| 3 | 10-12 अक्टूबर | सोशल मीडिया पर “उड़ता तीर” कमेंट विवाद, जमकर ट्रोलिंग; डीएसपी ने सफाई वीडियो जारी किया |
| 4 | 13 अक्टूबर 2026 | मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने डीएसपी अंजू यादव को APO किया |
| 5 | 14-15 अक्टूबर 2026 | मामला राज्यभर में चर्चा में; पुलिस आचरण और जवाबदेही पर बहस तेज |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: डीएसपी अंजू यादव को APO क्यों किया गया?
उत्तर: किशनगढ़ में अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारने के विवाद और बाद में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट के बाद वकीलों के भारी विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने उन्हें APO किया।
प्रश्न 2: APO का मतलब क्या होता है?
उत्तर: APO का मतलब है “पदस्थापन की प्रतीक्षा में” (Awaiting Posting Orders)। इसमें अधिकारी को किसी पद पर तैनाती नहीं मिलती और वह अगले आदेश तक प्रतीक्षा में रहता है। पुलिस महकमे में इसे गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई माना जाता है।
प्रश्न 3: थप्पड़ कांड कब और कहां हुआ था?
उत्तर: यह घटना 9 अक्टूबर 2026 को अजमेर जिले के किशनगढ़ में हुई थी। सड़क किनारे खड़ी कार की पार्किंग को लेकर हुए विवाद में ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव ने अधिवक्ता बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारा था, जिसका वीडियो वायरल हो गया।
प्रश्न 4: क्या डीएसपी ने माफी मांगी थी?
उत्तर: हां, दो बार। पहले 9 अक्टूबर की रात वकीलों के विरोध के बाद उन्होंने पीड़ित अधिवक्ता के साथ वीडियो बनाकर माफी मांगी थी। बाद में सोशल मीडिया कमेंट विवाद पर भी उन्होंने वीडियो जारी कर सफाई दी और कहा कि आवेश में आकर जल्दबाजी में कमेंट हो गया था। इसके बावजूद कार्रवाई की मांग बनी रही और अंततः उन्हें APO कर दिया गया।