जयपुर की सड़कों पर शनिवार को भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने पोस्टर और तख्तियां लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी — जेएनयू प्रकरण में आरोपित कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम की तुरंत गिरफ्तारी हो। मामला इतना गरमाया कि भाजपा कार्यालय से कांग्रेस दफ्तर की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने चौमूं हाउस सर्किल पर रोक दिया और इस दौरान पुलिस व महिला नेताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हो गई। जेएनयू बिमोल अकोइजम प्रकरण को लेकर राजस्थान की राजनीति में उबाल आ गया है और यह मामला अब दिल्ली से जयपुर तक पहुंच चुका है।
शनिवार को जयपुर में क्या हुआ
शनिवार शाम भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ के नेतृत्व में कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय से इकट्ठा होकर कांग्रेस दफ्तर का घेराव करने के लिए निकलीं। हाथों में पोस्टर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम की गिरफ्तारी की मांग के नारे लगा रही थीं। कुछ नारे उनके लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग वाले भी थे। पुलिस ने जुलूस को चौमूं हाउस सर्किल पर ही रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारी महिला नेताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रदर्शन के बाद मोर्चा के नेताओं ने प्रेस से बातचीत में कहा कि छात्राओं की सुरक्षा और निजता सर्वोपरि है और कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए।
11 छात्राओं की शिकायत से बर्खास्तगी तक: पूरा घटनाक्रम
इस विवाद की जड़ दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के जरिए प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति (आईसी) ने जांच के बाद बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। बर्खास्तगी आदेश पर विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी पंडित के हस्ताक्षर हैं और इसमें यूजीसी के नियमों व केंद्रीय सिविल सेवा नियमों का हवाला दिया गया है।
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| मई 2026 | छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ कुलपति को शिकायत दी। |
| जुलाई 2026 | सेमेस्टर शुरू होने के बाद मामला कैंपस में चर्चा में रहा। |
| 8-9 सितंबर 2026 | एबीवीपी ने कैंपस में प्रदर्शन कर जल्द कार्रवाई की मांग की। |
| 14 सितंबर 2026 | दिल्ली महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लेकर जेएनयू से रिपोर्ट मांगी। |
| 9 अक्टूबर 2026 | जेएनयू ने प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया। |
| 10 अक्टूबर 2026 | जयपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने गिरफ्तारी की मांग पर प्रदर्शन किया। |
रिपोर्टों के मुताबिक 11 छात्राओं ने प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायतों में क्लास के दौरान अनुचित टिप्पणियों, वाइवा में पेशेवर सीमा लांघने और कैंपस स्थित आवास पर आयोजित कार्यक्रमों में अनुचित व्यवहार जैसे आरोप शामिल थे। दिल्ली महिला आयोग ने सितंबर में शिकायतों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब तलब किया था। बता दें कि ये सभी आरोप हैं और बर्खास्तगी विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई है।
कौन हैं डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम
डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं। वे जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थे। सांसद रहते हुए विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की सेवा में बने रहना और अब आरोपों के बाद बर्खास्त होना — यही दो तथ्य इस मामले को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ले आए हैं। संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका परिचय प्रोफेसर और सांसद दोनों के तौर पर दर्ज है। बर्खास्तगी के आदेश में शिकायतों के विस्तृत ब्योरे और जांच के अलग-अलग निष्कर्षों का उल्लेख नहीं किया गया है; विश्वविद्यालय ने कहा है कि कार्रवाई आंतरिक समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है।
राजस्थान में सियासी हलचल: नेताओं के बयान
जेएनयू बिमोल अकोइजम मामले पर जयपुर के प्रदर्शन में भाजपा के कई नेताओं ने बयान दिए। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ ने कहा कि राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों से महिला अधिकारों और सम्मान की बात करते हैं, ऐसे में कांग्रेस को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को न्याय मिलना चाहिए और उनकी पहचान व निजता की रक्षा होनी चाहिए।
जयपुर शहर की सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि जेएनयू की छात्राओं से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मामला नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से पूछा कि वह छात्राओं के न्याय और जवाबदेही के मुद्दे पर क्या रुख रखता है।
राजस्थान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों में शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा, निजता और गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए। जांच के तथ्यों को जिम्मेदारी के साथ सामने रखा जाना चाहिए ताकि छात्राओं पर सामाजिक या मानसिक दबाव न पड़े।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनीषा सिंह ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल पूछते हुए कहा कि महिला सम्मान केवल राजनीतिक भाषणों का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यवहार और जवाबदेही में भी नजर आना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई हो और छात्राओं को न्याय मिले।
आगे क्या होगा
इस मामले के आगे दो मोर्चों पर बढ़ने की संभावना है। पहला, विश्वविद्यालय प्रशासन की बर्खास्तगी के बाद आरोपित की ओर से कानूनी रास्ता अपनाए जाने की संभावना — सेवा नियमों के तहत अपील का विकल्प खुला रहता है। दूसरा, गिरफ्तारी की मांग को लेकर राजनीतिक दबाव। भाजपा महिला मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की है। वहीं कांग्रेस की ओर से इस प्रदर्शन पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। महिला सुरक्षा से जुड़े इस तरह के मामलों में राजस्थान में पहले भी आंदोलन हुए हैं, जिनका असर नीतिगत फैसलों पर पड़ा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. जेएनयू बिमोल अकोइजम मामला क्या है? उत्तर: यह जेएनयू के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा मामला है। विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को उन्हें बर्खास्त कर दिया।
प्रश्न 2. जयपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने प्रदर्शन क्यों किया? उत्तर: मोर्चा की मांग है कि मामले में आरोपित की तुरंत गिरफ्तारी हो और निष्पक्ष जांच के बाद कड़ी कार्रवाई हो। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
प्रश्न 3. बिमोल अकोइजम को किसने बर्खास्त किया? उत्तर: जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया। आदेश पर कुलपति शांतिश्री डी पंडित के हस्ताक्षर हैं।
प्रश्न 4. क्या मामले में गिरफ्तारी हुई है? उत्तर: अभी तक विश्वविद्यालय स्तर पर बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई है। गिरफ्तारी की मांग भाजपा महिला मोर्चा के प्रदर्शन के केंद्र में है, लेकिन किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।