कोटा प्रसूता मामला: डायलिसिस के सहारे 5 प्रसूताएं, गहलोत ने सरकार को घेरा — ट्रांसप्लांट और मुआवजे की मांग

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑपरेशन के बाद किडनी फेल होने की शिकार पांच प्रसूताओं की जिंदगी आज डायलिसिस की सुई पर टिकी है। सोमवार को जब ये पीड़िताएं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कोटा कैंप कार्यालय पहुंचीं, तो उनकी आंखों में एक ही सवाल था — किडनी ट्रांसप्लांट कब होगा? बिरला ने करीब दस मिनट तक उनकी बात सुनी और बेहतर इलाज के साथ उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।

पीड़िता धन्नी के पति मोहन सुमन बताते हैं कि उनकी पत्नी की हालत दिन-ब-दिन कमजोर हो रही है और डायलिसिस के बाद के 24 घंटे पूरा परिवार खौफ के साये में गुजारता है। वे एक-एक मिनट गिनकर काट रहे हैं, मन में लगातार यही डर है कि न जाने कब क्या हो जाए।

इस बीच मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि निःशुल्क इलाज और ट्रांसप्लांट के वादे के बावजूद परिजनों को आगे के इलाज की कोई जानकारी नहीं दी जा रही। गहलोत ने जल्द ट्रांसप्लांट, पूरा मुआवजा और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

सोमवार को बिरला के दरबार में पीड़ितों की गुहार

सोमवार (5 अक्टूबर) को कोटा स्थित कैंप कार्यालय में पीड़ित प्रसूताओं और उनके परिजनों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इलाज की गुहार लगाई। बिरला ने करीब 10 मिनट तक उनकी बात सुनी और बेहतर इलाज के साथ उचित मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया। पीड़िता रागिनी के भाई विकास मीणा ने बताया कि पांच महीने से उन्हें आगे के इलाज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही — किडनी के लिए डोनर की क्या प्रक्रिया होगी, ये कोई साफ-साफ नहीं बता रहा। परिजनों का कहना है कि उनकी आस टूटने से पहले सरकार को कुछ करना ही होगा।

गहलोत के सीधे सवाल: ‘5 मौतों का जिम्मेदार कौन?’

मंगलवार को अशोक गहलोत ने दैनिक नवज्योति की खबर शेयर करते हुए कहा कि कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑपरेशन के बाद गुर्दा फेल होने से पांच प्रसूताएं आज डायलिसिस के सहारे जिंदगी की सांसें गिन रही हैं, लेकिन परिजनों को आगे के इलाज की कोई जानकारी तक नहीं दी जा रही। गहलोत के मुख्य आरोप:

  • 5 मौतें, 5 डायलिसिस पर: गहलोत ने दावा किया कि इस मामले में पांच महिलाओं की जान जा चुकी है। सवाल सीधा है — अगर किसी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं थी, तो पांच महिलाओं की मौत और गुर्दा फेल होने का जिम्मेदार कौन है?
  • वादे और हकीकत में फर्क: प्रशासन ने 16 जुलाई को निःशुल्क इलाज और गुर्दा प्रत्यारोपण का भरोसा दिया था, लेकिन अंग दाता की सूची में पंजीकरण दो महीने बाद 15 सितंबर को हुआ।
  • डॉक्टरों की बहाली पर सवाल: जांच समितियों ने निलंबित तीनों चिकित्सकों को क्लीनचिट देकर बहाल कर दिया, लेकिन जवाबदेही का सवाल अपनी जगह बना हुआ है।
  • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं: पीड़ित परिवार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है?
  • मुआवजे की मांग: जिन बेटियों की जिंदगी दांव पर है, उन्हें जल्द प्रत्यारोपण के साथ पूरा मुआवजा दिया जाए और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

16 जुलाई का समझौता: क्या-क्या तय हुआ था

16 जुलाई को प्रशासन और परिजनों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में समझौता हुआ था। बैठक में एडीएम (शहर) विनोद कुमार मल्होत्रा, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. निलेश कुमार जैन और नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खण्डेलिया मौजूद थे। तय हुआ:

  • भर्ती पांचों प्रसूताओं (पिंकी, सुशीला बाई, आरती, धन्नीबाई और रागिनी मीणा) का पूरी तरह निःशुल्क इलाज
  • कैडेवर (अंगदान) सूची में प्राथमिकता से पंजीकरण
  • परिजन डोनर उपलब्ध कराएं तो भी पूरी तरह निःशुल्क ट्रांसप्लांट
  • एम्स जोधपुर या राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में मुफ्त ट्रांसप्लांट और उसके बाद की देखभाल

परिजनों का आरोप है कि सहमति करीब 80 दिन पहले बनने के बावजूद आधिकारिक रजिस्ट्रेशन की बात 15 सितंबर को सामने आई — यह काम काफी समय पहले कर लेना चाहिए था।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष: ‘इलाज निःशुल्क, रजिस्ट्रेशन हो चुका’

अस्पताल अधीक्षक कार्यालय से जारी पत्र में प्राचार्य डॉ. निलेश जैन ने बताया कि सभी मरीजों का अब तक निःशुल्क उपचार चल रहा है और 15 सितंबर 2026 को SOTTO पोर्टल पर पंजीकरण किया जा चुका है। मरीजों को NOTTO गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित प्राथमिकता से अवगत कराया गया है; उपयुक्त डोनर मिलते ही निःशुल्क ट्रांसप्लांट होगा।

टाइमलाइन: कब क्या हुआ

तारीखघटना
मई 202613 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत; कई मरीजों में किडनी फेलियर
मई-जून 20263 डॉक्टर निलंबित; चार उच्चस्तरीय जांच कमेटियां गठित
16 जुलाई 2026प्रशासन-परिजनों में समझौता: मुफ्त इलाज, ट्रांसप्लांट का वादा
15 सितंबर 2026पांचों प्रसूताओं का SOTTO पोर्टल पर पंजीकरण
2-3 अक्टूबर 2026क्लीनचिट के बाद तीनों डॉक्टर बहाल
5 अक्टूबर 2026पीड़िताओं ने ओम बिरला से इलाज की गुहार लगाई
6 अक्टूबर 2026गहलोत ने सरकार पर आरोप लगाया; ट्रांसप्लांट-मुआवजे की मांग

पीड़ित परिवारों की 4 बड़ी मांगें

  1. जल्द से जल्द किडनी ट्रांसप्लांट — अविलंब ट्रांसप्लांट की व्यवस्था हो।
  2. पूरा मुआवजा — अपनों को खोने वाले और अस्पताल के चक्कर काट रहे परिवारों को उचित मुआवजा मिले।
  3. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो — चारों जांच कमेटियों के निष्कर्ष जनता के सामने रखे जाएं।
  4. जवाबदेही तय हो — 5 मौतों और कई प्रसूताओं के किडनी फेल होने की जिम्मेदारी तय की जाए।

आपके काम की जानकारी: राजस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया

राजस्थान में अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था SOTTO (राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन) के जरिए चलती है, जो NOTTO के दिशा-निर्देशों के तहत काम करता है। मृतक दाता की सूची में पंजीकरण के बाद उपयुक्त डोनर मिलने पर प्राथमिकता क्रम में ट्रांसप्लांट होता है। सरकारी अस्पतालों में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना के तहत ट्रांसप्लांट निःशुल्क हो सकता है। जानकारी के लिए नजदीकी मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग या SOTTO की वेबसाइट से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1: कोटा प्रसूता मामले में आखिर हुआ क्या था?

मई 2026 में कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में 13 दिन के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी। कई मरीजों में किडनी फेलियर सामने आया था, जिसके बाद तीन डॉक्टर निलंबित किए गए थे।

Q2: फिलहाल कितनी प्रसूताएं डायलिसिस पर हैं?

पांच — पिंकी, सुशीला बाई, आरती, धन्नीबाई और रागिनी मीणा — फिलहाल डायलिसिस के सहारे हैं और किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रही हैं।

Q3: अशोक गहलोत ने क्या आरोप लगाए हैं?

परिजनों को आगे के इलाज की जानकारी न देने, 16 जुलाई के वादे के बावजूद 15 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन में देरी, डॉक्टरों की बहाली के बाद भी जवाबदेही तय न होने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न करने के आरोप।

Q4: किडनी ट्रांसप्लांट की मौजूदा स्थिति क्या है?

अस्पताल के अनुसार 15 सितंबर 2026 को पांचों मरीजों का SOTTO पोर्टल पर पंजीकरण हो चुका है; उपयुक्त डोनर मिलते ही निःशुल्क ट्रांसप्लांट होगा।

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