श्रीगंगानगर जिले के छोटे से गांव में रहने वाले एक शख्स ने सरकार से फांसी की मांग की है जिसका कारण उसने बताया कि वह पिछले 13 साल से एक सरकारी अस्पताल में स्वीपर का काम कर रहा है जिसके एवज में उसे ₹75 प्रति माह सैलरी दी जा रही है जिससे वह अपना घर परिवार का खर्च नहीं चला सकता है। इसके लिए उसने 20 साल तक कानूनी लड़ाई भी लड़ी है लेकिन सरकारी सिस्टम से उसे निराशा ही प्राप्त हुई है ।

इस शख्स का नाम बलराम भाटिया बताया जा रहा है जिसे सन 1985 में अंशकालीन स्वीपर पद पर नियुक्त किया गया था तथा उन्हें श्रीगंगानगर जिले के पदमपुर अस्पताल में नियुक्त किया गया था फिर उन्हें 1989 में नौकरी से हटा दिया गया था जिसके पास उन्होंने लेबर कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़कर नौकरी को वापस प्राप्त किया था।

20 साल बाद लेबर कोर्ट में बलराम भाटिया के पक्ष में फैसला सुनाया। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसके खिलाफ रिट लगाई लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। लेबर कोर्ट ने बलराम भाटिया को 2001 से बहाली के आदेश दिए। आदेश पर स्वास्थ्य विभाग में 18 मार्च 2009 को भाटिया को पदमपुर अस्पताल में नियुक्ति दी। लेकिन 2009 से उन्हें ₹75 मासिक वेतन ही दिया जा रहा है।

बलराम भाटिया ने सरकारी सिस्टम से हार मान कर सरकार को फांसी देने के लिए प्रार्थना की है उनका कहना है कि सरकार द्वारा दी जा रही तनखा से वह अपना परिवार नहीं चला पा रहे हैं जिसके कारण है बहुत बड़े कर्ज तले दब गए हैं अभी आप तो सरकार उन्हें उनकी मेहनत के पैसे दे या फिर उन्हें फांसी दे दे।