टोंक में DAP पर कलेक्टर टीना डाबी और नरेश मीणा की फोन पर बातचीत: ‘खाद का संकट नहीं’ — टोंक के आंकड़े और किसानों के लिए मतलब

टोंक। राजस्थान में खाद को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक फोन कॉल ने नई बहस छेड़ दी है। टोंक की जिला कलेक्टर टीना डाबी और किसान नेता नरेश मीणा के बीच हुई करीब साढ़े तीन मिनट की बातचीत का वीडियो सामने आया है, जिसमें कलेक्टर जिले में DAP की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट करती नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि टोंक में खाद का कोई संकट नहीं है और प्रशासन किसानों को खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है। दूसरी ओर नरेश मीणा किसानों की शिकायतों को लेकर अड़े हैं — निर्धारित कीमत पर खाद मिले और खाद के साथ किसी और सामान की जबरदस्ती न हो।

यह बातचीत इसलिए अहम है, क्योंकि रबी सीजन की बुवाई का समय नजदीक है और DAP-यूरिया को लेकर कई जिलों से शिकायतें आ रही हैं। प्रशासन का दावा और जमीनी शिकायतें — दोनों के बीच की यही खाई इस फोन कॉल को खबर बना रही है।

फोन पर साढ़े तीन मिनट — क्या-क्या बात हुई

बताया जा रहा है कि यह वीडियो नरेश मीणा ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया है। बातचीत में कलेक्टर टीना डाबी नरेश मीणा से किसानों को समझाने और खाद की उपलब्धता को लेकर आश्वस्त करने की अपील करती हैं। उनका संदेश साफ है — जिले में खाद की कमी नहीं है, इसलिए किसानों को घबराने की जरूरत नहीं।

जवाब में नरेश मीणा किसानों की ओर से आ रही शिकायतों का मुद्दा उठाते हैं। उनकी दो ठोस मांगें हैं — DAP खाद निर्धारित कीमत, यानी 1,350 रुपये प्रति कट्टा पर मिले, और खाद के साथ किसी ‘अटैचमेंट’ यानी दूसरे सामान की अनिवार्यता खत्म हो। कई जगह किसानों की शिकायत रही है कि विक्रेता खाद के साथ कीटनाशक या अन्य उत्पाद लेने पर मजबूर करते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है।

प्रशासन की ओर से इन शिकायतों पर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिए जाने की बात भी सामने आई है। यानी एक तरफ कलेक्टर उपलब्धता का दावा कर रही हैं, तो दूसरी तरफ शिकायतों पर एक्शन का आश्वासन भी दे रही हैं।

टोंक का DAP गणित — आंकड़े क्या कहते हैं

बातचीत में टोंक जिले के DAP भंडार और रबी सीजन की मांग के आंकड़े भी सामने आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक तस्वीर कुछ इस तरह है:

मद आंकड़ा
खरीफ सीजन का बचा DAP स्टॉक करीब 650 मीट्रिक टन
रबी सीजन के लिए अनुमानित मांग करीब 18,000 मीट्रिक टन
जिले में DAP आपूर्ति शुरू 2 अक्टूबर से
DAP की निर्धारित कीमत (मांग) 1,350 रुपये प्रति कट्टा

ये आंकड़े बताते हैं कि रबी सीजन की मांग मौजूदा स्टॉक से कई गुना ज्यादा है। यही वजह है कि 2 अक्टूबर से जिले में DAP की आपूर्ति शुरू की गई है। प्रशासन का कहना है कि आपूर्ति की व्यवस्था के साथ स्थिति नियंत्रण में है, जबकि किसान नेता मांग कर रहे हैं कि वितरण पारदर्शी हो और हर किसान को तय कीमत पर खाद मिले।

शिकायतें बनाम दावे — कहां है असली तस्वीर

नरेश मीणा का आरोप है कि कई जगह किसानों से निर्धारित से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है या खाद के साथ अन्य सामान लेने की शर्त रखी जा रही है। प्रशासन का पक्ष है कि ऐसी शिकायतों की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

प्रदेश स्तर पर कृषि विभाग का दावा है कि रबी सीजन के लिए खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। विभाग के मुताबिक 22 सितंबर तक राज्य में करीब 2.70 लाख मीट्रिक टन यूरिया और लगभग 1 लाख मीट्रिक टन DAP का स्टॉक उपलब्ध कराया जा चुका था, और फर्टिलाइजर सेल ऐप (FFS) के जरिए सवा लाख मीट्रिक टन यूरिया की अग्रिम आपूर्ति भी हो चुकी है।

लेकिन खरीफ सीजन में कई जिलों में खाद की दुकानों के बाहर लंबी लाइनों की खबरें भी आई थीं। यानी सरकारी भंडार के दावे और दुकान तक पहुंचने वाली खाद के बीच का फर्क ही किसानों की असली परेशानी है — और टोंक का यह फोन कॉल उसी फर्क को उजागर करता है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि — संक्षेप में

नरेश मीणा इन दिनों खाद की उपलब्धता को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को उन्होंने बारां कलेक्ट्रेट के बाहर आमरण अनशन शुरू किया था और उसके बाद बारां से जयपुर की ओर पैदल कूच भी शुरू कर दिया। उनकी मांग है कि किसानों को खेती के रकबे के अनुपात में पर्याप्त खाद तय कीमत पर मिले। (इस आंदोलन की पूरी जानकारी हमने 4 अक्टूबर की रिपोर्ट में दी थी।)

नरेश मीणा 2024 के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान सुर्खियों में आए थे। सितंबर 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद वे किसानों के मुद्दों को लेकर फिर सक्रिय हैं।

किसानों के लिए काम की बातें

DAP या यूरिया खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें, ताकि न ज्यादा कीमत चुकानी पड़े और न ही अनावश्यक सामान लेना पड़े:

  • तय कीमत पर ही खरीदें: DAP का निर्धारित मूल्य 1,350 रुपये प्रति कट्टा है। ज्यादा मांगा जाए तो रसीद जरूर लें।
  • अटैचमेंट की शिकायत करें: खाद के साथ अन्य उत्पाद लेने की जबरदस्ती हो तो जिला कृषि अधिकारी या कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
  • रसीद लेना न भूलें: बिना रसीद खरीदी खाद पर बाद में शिकायत साबित करना मुश्किल होता है।
  • सहकारी समितियों से लें: प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) से खाद लेने पर तय कीमत और सही वजन की संभावना ज्यादा रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टोंक कलेक्टर टीना डाबी ने नरेश मीणा से फोन पर क्या कहा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक कलेक्टर ने कहा कि टोंक में खाद का कोई संकट नहीं है और प्रशासन किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहा है। उन्होंने मीणा से किसानों को इस बारे में आश्वस्त करने की अपील भी की।

नरेश मीणा की मुख्य मांगें क्या हैं?

DAP 1,350 रुपये प्रति कट्टा की तय कीमत पर मिले, खाद के साथ किसी अन्य सामान (अटैचमेंट) की अनिवार्यता खत्म हो, और ज्यादा कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई हो।

टोंक में DAP का कितना स्टॉक और कितनी मांग है?

रिपोर्ट्स के अनुसार जिले में खरीफ सीजन का करीब 650 मीट्रिक टन DAP स्टॉक बचा है, जबकि रबी सीजन के लिए करीब 18,000 मीट्रिक टन की मांग बताई गई है। 2 अक्टूबर से आपूर्ति शुरू हो गई है।

खाद की कालाबाजारी या अटैचमेंट की शिकायत कहां करें?

जिला कृषि अधिकारी, कलेक्टर कार्यालय या कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। रसीद के साथ शिकायत करने पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।

टोंक का यह फोन कॉल दिखाता है कि खाद का मुद्दा अब सिर्फ भंडार के आंकड़ों का नहीं, बल्कि वितरण की पारदर्शिता का है। प्रशासन के दावे और किसानों की शिकायतों के बीच का फर्क तभी मिटेगा, जब तय कीमत पर बिना शर्त खाद हर किसान तक पहुंचेगी। रबी बुवाई का समय करीब है — ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में टोंक समेत प्रदेश के अन्य जिलों में वितरण व्यवस्था कितनी सुधरती है।

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