Rajasthan Wildlife Week 2026: नाहरगढ़ से झालाना तक शुरू हुआ 72वां वन्यजीव सप्ताह, इस बार तेंदुए पर है खास फोकस

अक्टूबर का पहला हफ्ता राजस्थान के जंगलों के लिए हमेशा से खास रहा है, लेकिन इस साल की शुरुआत कुछ अलग है। जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 2 अक्टूबर को 72वें वन्यजीव सप्ताह-2026 का आगाज हुआ, और इस बार वन विभाग ने एक साफ संदेश दिया है — अब सिर्फ बाघ ही नहीं, तेंदुए की सुरक्षा और इंसानों के साथ उनका शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व इस सप्ताह का केंद्रीय विषय होगा। 2 से 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस सप्ताह में झालाना-आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व से लेकर जयपुर चिड़ियाघर तक कार्यक्रम होंगे, और खास बात यह है कि स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रवेश बिल्कुल निशुल्क रहेगा।

अगर आप जयपुर में रहते हैं, तो यह सप्ताह बच्चों के लिए प्रतियोगिताओं, फोटोग्राफी और लघु फिल्मों का खजाना है।

इस बार तेंदुआ क्यों है केंद्र में?

राजस्थान को आमतौर पर बाघों की धरती कहा जाता है — रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व इसके गवाह हैं। लेकिन असलियत यह है कि राज्य के जंगलों में सबसे ज्यादा मनुष्य-वन्यजीव संपर्क तेंदुए के साथ होता है। झालाना-आमागढ़ जैसे शहरी सीमा से सटे रिजर्व में तेंदुए आबादी के बेहद करीब रहते हैं, और आए दिन उनके गांव-शहर के नजदीक देखे जाने की खबरें आती हैं।

इसीलिए वन विभाग ने इस बार दो चीजों को केंद्र में रखा है — मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और तेंदुआ संरक्षण। साफ जंगल का मतलब है स्वस्थ आवास, और स्वस्थ आवास का मतलब है जानवरों को आबादी की तरफ आने की कम मजबूरी।

बच्चों और युवाओं के लिए सप्ताहभर का खजाना

वन्यजीव सप्ताह के कार्यक्रमों में इस बार विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा तरजीह दी गई है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क और जयपुर चिड़ियाघर में सप्ताहभर बच्चों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। पहले ही दिन स्कूली छात्र-छात्राओं को बायोलॉजिकल पार्क का भ्रमण कराया गया, जहां वन विभाग की टीम ने उन्हें वन्यजीवों की प्रजातियों, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के बारे में समझाया।

प्रतियोगिताओं की सूची भी काफी लंबी है:

  • निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता — वन्यजीव और पर्यावरण विषयों पर
  • वन्यजीव चित्र पहचान — प्रजातियों को पहचानने की प्रतिस्पर्धा
  • फोटोग्राफी और लोगो डिजाइन — युवाओं के लिए विशेष आकर्षण
  • हाथी सजावट प्रतियोगिता — परंपरा और कला का संगम
  • चित्रकला, वॉल पेंटिंग, फेस पेंटिंग, रंगोली — बच्चों के लिए रचनात्मक मंच
  • भाषण, पोस्टर मेकिंग और क्ले मॉडलिंग — संरक्षण पर अपनी सोच प्रस्तुत करने का मौका
  • लघु नाटक और लघु फिल्म — रेस्क्यू और संरक्षण की कहानियां परदे पर

जैसा कि एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया, इन कार्यक्रमों का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं है — बच्चे जब वन्यजीव संरक्षण पर खुद चित्र बनाएंगे या नाटक करेंगे, तो यह सोच उनके साथ बड़ी होगी।

सप्ताहभर का कार्यक्रम: कहां, कब, कैसे शामिल हों

वन्यजीव सप्ताह 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। 8 अक्टूबर को समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

स्थान मुख्य गतिविधियां
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क उद्घाटन, शैक्षिक भ्रमण, लघु फिल्म, प्रतियोगिताएं
झालाना-आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व जागरूकता कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान
नाहरगढ़ अभयारण्य पौधारोपण, हैबिटेट एनरिचमेंट गतिविधियां
जयपुर चिड़ियाघर शैक्षिक भ्रमण, प्रतियोगिताएं
अन्य वन क्षेत्र स्वच्छता अभियान, जागरूकता कार्यक्रम

सप्ताहभर इन स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं, स्वच्छता अभियान, पौधारोपण और हैबिटेट एनरिचमेंट जैसी गतिविधियां चलेंगी। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शैक्षिक भ्रमण के दौरान पक्षियों और पर्यावरण की जानकारी दी जाएगी, साथ ही वन्यजीव रेस्क्यू से जुड़ी जानकारी और संरक्षण पर लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी।

अगर आप अपने बच्चों के साथ जाना चाहते हैं, तो नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क या जयपुर चिड़ियाघर सप्ताह का सबसे आसान विकल्प है — और विद्यार्थियों का प्रवेश निशुल्क है।

उद्घाटन के मौके पर वन विभाग का संदेश

शुक्रवार को नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हुए शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर वन संरक्षक रामकरण खेरवा मौजूद रहे। उप वन संरक्षक जयपुर उत्तर मनफूल विश्नोई सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

डीएफओ आशीष व्यास ने कहा कि संरक्षण के प्रति जागरूकता ही असली सुरक्षा है — पहले लोगों के दिल में जानवरों के लिए जगह बननी चाहिए, कानून और गश्त तो बाद में आते हैं।

पहले दिन ही नाहरगढ़, झालाना और आमागढ़ सहित अन्य वन क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छ वन-पर्यावरण का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों और विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ वन क्षेत्रों को साफ रखने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण का संकल्प लिया।

वन्यजीव सप्ताह: एक पुरानी परंपरा, नई चुनौतियां

भारत में वन्यजीव सप्ताह हर साल 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है — यह परंपरा 1952 से चली आ रही है, जब पहली बार वन्यजीवों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सप्ताह मनाने का फैसला हुआ। तब से हर साल अक्टूबर के पहले हफ्ते में देशभर में वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। 2026 में यह 72वां वन्यजीव सप्ताह है।

राजस्थान के संदर्भ में इस सप्ताह की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। राज्य में चार टाइगर रिजर्व हैं और दर्जनों अभयारण्य, लेकिन विकास और शहरीकरण के दबाव में जंगलों के किनारे रहने वाले समुदायों और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ा है। तेंदुए अक्सर गांवों के आसपास देखे जाते हैं, जिससे डर और कभी-कभी संघर्ष की स्थिति बनती है। वन विभाग की इस बार की रणनीति — बच्चों को प्रकृति से जोड़ना और तेंदुए पर फोकस — इसी समस्या की जड़ पर प्रहार करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है। जो बच्चा आज झालाना के जंगल में तेंदुए की कहानी सुनकर बड़ा होगा, वही कल उस तेंदुए की रक्षा के लिए खड़ा होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

वन्यजीव सप्ताह 2026 कब तक चलेगा?

2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक। समापन समारोह 8 अक्टूबर को होगा, जिसमें प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

क्या बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क है?

हां। वन्यजीव सप्ताह के दौरान नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क और जयपुर चिड़ियाघर में विद्यार्थियों का प्रवेश निशुल्क रहेगा।

इस बार का मुख्य फोकस क्या है?

मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और तेंदुआ संरक्षण। इसके अलावा पर्यावरण जागरूकता, स्वच्छता और जैव विविधता भी प्रमुख विषय हैं।

कौन-कौन से स्थानों पर कार्यक्रम हो रहे हैं?

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, नाहरगढ़ अभयारण्य, झालाना-आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व, जयपुर चिड़ियाघर और अन्य वन क्षेत्र।

सामान्य नागरिक कैसे भाग ले सकते हैं?

स्वच्छता अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और पौधारोपण गतिविधियों में कोई भी शामिल हो सकता है। बच्चों के लिए प्रतियोगिताओं में भाग लेने की जानकारी संबंधित वन क्षेत्र कार्यालय से मिल सकती है।

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