जुलाई 2023 में टेंडर हो गया, लेकिन जमीनी स्तर पर काम आज तक शुरू नहीं हुआ। पाली के किसानों का धैर्य आखिरकार रविवार को मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गया। जिला किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात कर जवाई बांध पुनर्भरण योजना में हुए विलंब पर साफ शब्दों में नाराजगी जताई। बैठक में मुख्यमंत्री ने तुरंत सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से दूरभाष पर बात की और तीन दिन के भीतर जयपुर में किसान संघर्ष समिति तथा सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दिए।
यह मुलाकात पाली जिले के करीब 150 गांवों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, जहां पेयजल और सिंचाई दोनों की समस्या पिछले कई वर्षों से बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि जवाई बांध पुनर्भरण योजना का काम जमीनी स्तर पर शीघ्र शुरू करवाया जाएगा और यह किसान तथा क्षेत्रीय जनहित का प्राथमिक विषय है।
तीन दिन में जयपुर में होगा बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किसान प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के तुरंत बाद सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भुवनेश और जोधपुर के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) प्रदीप रुस्तोगी से फोन पर वार्ता की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि किसान संघर्ष समिति पाली के प्रतिनिधियों और सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक तीन दिन के भीतर जयपुर में आयोजित की जाए, जिसमें योजना पर समुचित और त्वरित निर्णय लिया जाएगा।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी सहमति दी कि आगामी बैठक पाली में भी रखी जाएगी, ताकि स्थानीय किसानों की समस्याओं को जमीन पर समझा जा सके। यह सीधा संदेश है कि सरकार इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
टेंडर हुए तीन साल, काम आज तक शून्य
प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष गिरधारीसिंह मण्डली ने जल आंकड़ों और तथ्यों के साथ किसानों का पक्ष रखा। उनका कहना था कि जवाई बांध पुनर्भरण योजना का टेंडर जुलाई 2023 में ही हो चुका था, लेकिन इसके बाद न तो धरातल पर काम हुआ और न ही विलंब की कोई स्पष्ट वजह सामने आई। किसानों ने इस उपेक्षा पर गहरी नाराजगी जताई और मांग की कि योजना को तेजी से धरातल पर उतारा जाए।
किसान संघर्ष समिति के सदस्य रतनसिंह ने बैठक में एक और गंभीर विषय उठाया — स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों की बात सरकार तक नहीं पहुंच पा रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों का हित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसान सीधे भी उनसे संवाद रख सकते हैं। इस एक वाक्य ने बैठक का माहौल पूरी तरह बदल दिया और किसानों को सीधी राहत का भरोसा मिला।
किसानों ने कौन-कौन सी मांगें रखीं?
बैठक में गिरधारीसिंह मण्डली ने क्षेत्र की जल समस्याओं का विस्तृत विवरण दिया। किसानों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
| मांग | असर का क्षेत्र |
|---|---|
| सोम कमला, देवास 3 व 4, साबरमती बेसिन, वाकल, बुझा और चक चंडमारिया बांध से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो | पाली जिले के गांवों में पेयजल संकट का स्थायी समाधान |
| वंचित क्षेत्रों तक सिंचाई का पानी नहरीकरण (नहरों के जाल) के जरिए पहुंचाया जाए | सिंचाई से वंचित इलाकों में खेती का विस्तार |
| जालोर नदी में 1200 एमसीएफटी पानी प्रवाहित किया जाए | नदी बेसिन के कुएं रिचार्ज होंगे, भूजल स्तर सुधरेगा |
| जवाई बांध पुनर्भरण योजना का काम जमीनी स्तर पर तुरंत शुरू हो | 150 गांवों में पेयजल और सिंचाई दोनों की समस्या का स्थायी हल |
प्रतिनिधिमंडल में पिरोसा गोपाल सिंह बिठुडा, एड. गिरधारीमीणा डेडा, एड. इंद्रसिंह लापोद, घीसुलाल चौधरी, महेंद्रसिंह डिंगाई, मदनलाल गुड़ा बिच्छू, देवेंद्रसिंह मंडली, पूराराम सिरवी और बाबूलाल जांगिड़ गुंदोज समेत बड़ी संख्या में किसान नेता शामिल थे।
जवाई पुनर्भरण योजना आखिर है क्या?
जवाई नहर का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1936 में यह नहर जोधपुर के पेयजल आपूर्ति के लिए बनाई गई थी और 1959 तक यह पूरी तरह चालू रही। लेकिन 2009 के बाद नहर का रखरखाव नहीं होने से यह जर्जर हो गई और इसका उपयोग बंद हो गया।
अब जवाई पुनर्भरण योजना के तहत इस ऐतिहासिक नहर को फिर से चालू किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत करीब 2280 करोड़ रुपये है। योजना के तहत ढोला तालाब, जैतपुरा, गुंदोज बांध, हाथलाई, एंदला बांध, लाखोटिया, निंबली उर्रा और खारड़ा बांध समेत कई जलाशयों को पुनः भरा जाएगा। हेमावास नहर के माध्यम से रूपावास, गिरोलिया और वायद बांध को भी पानी की आपूर्ति होगी।
इस योजना से पाली को 2194 एमसीएफटी और जोधपुर को 441 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है, जिससे सूखे के दिनों में भी दोनों जिलों की प्यास बुझाई जा सकेगी। नहर को दुरुस्त करने के लिए अतिक्रमण हटाने और ढलान को ठीक करने का काम भी योजना का हिस्सा है।
पाली का जल संकट कितना गंभीर है?
पाली की जल स्थिति को समझने के लिए जवाई बांध का मौजूदा स्तर ही काफी है। शहर की जीवनरेखा कहे जाने वाले जवाई बांध में पानी का स्तर घटकर मात्र 24 फीट रह गया है, जबकि बांध की कुल भराव क्षमता 61.25 फीट है। यानी बांध अपने क्षमता के आधे से भी कम पर पहुंच चुका है।
यह संकट सिर्फ बांध तक सीमित नहीं है। कमजोर मानसून के बाद राजस्थान के 41 में से 31 जिलों में चारे और पानी की स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। ऐसे में जवाई बांध पुनर्भरण योजना पाली के लिए केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि पेयजल सुरक्षा की दीवार बन सकती है।
आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब सबकी नजरें जयपुर में होने वाली संयुक्त बैठक पर हैं। किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर तीन दिन की बैठक में ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन की राह भी खुली रहेगी। फिलहाल सरकार ने बातचीत के दरवाजे खोल दिए हैं और किसानों ने भरोसा जताया है।
यह भी अहम है कि मुख्यमंत्री ने खुद सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारियों से फोन पर बात की — यह दर्शाता है कि सरकार इस विषय को कितनी गंभीरता से ले रही है। अगर बैठक में सहमति बनती है और पाली में प्रस्तावित अगली बैठक भी होती है, तो जवाई बांध पुनर्भरण योजना अंततः कागजों से निकलकर जमीन पर उतर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. जवाई बांध पुनर्भरण योजना क्या है?
जवाई बांध पुनर्भरण योजना राजस्थान की एक महत्वाकांक्षी जल परियोजना है, जिसके तहत 1936 में बनी ऐतिहासिक जवाई नहर को फिर से चालू किया जाएगा और कई जलाशयों को दोबारा भरा जाएगा। इससे पाली और जोधपुर जिलों को अतिरिक्त पानी मिलेगा।
2. किसानों ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की?
पाली के किसान प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जुलाई 2023 में टेंडर हुई जवाई बांध पुनर्भरण योजना का काम तुरंत शुरू हो, 150 गांवों में पेयजल-सिंचाई सुनिश्चित हो, कई बांधों से पेयजल आपूर्ति हो और जालोर नदी में 1200 एमसीएफटी पानी छोड़ा जाए।
3. मुख्यमंत्री ने किसानों को क्या आश्वासन दिया?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीन दिन में जयपुर में किसान संघर्ष समिति और सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दिए। अगली बैठक पाली में भी होगी। उन्होंने कहा कि किसान सीधे उनसे भी संवाद रख सकते हैं।
4. जवाई बांध की मौजूदा स्थिति क्या है?
जवाई बांध में पानी का स्तर घटकर करीब 24 फीट रह गया है, जबकि बांध की कुल भराव क्षमता 61.25 फीट है। कमजोर मानसून के बाद पाली में पेयजल संकट गहरा गया है।
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